-- तीखा तीर --

चालीसा पर ज़िन्हे  कभी था नाज 

क्यूं उनको आज  हो  रहा इतराज 

वह से तो बम बम कहते फिरते थे 

सत्ता ने पैदा कर  दी उनको खाज 

मन अंदर अब भी तो नतमस्तक हैं 

खुल यदि बोला  तो जायेगा  ताज 

    -- वीरेन्द्र तोमर