सेवानिवृतों के हवाले सहकारी चीनी मिलें

खाली पदों पर भर्ती न होने से कामकाज भगवान भरोसे 

सात-आठ बार निकली वैकेंसी, उपयुक्त न मिला कोई

लखनऊ। गन्ना विकास और चीनी उद्योग को बढ़ावा देने को जहां प्रतिबद्धता को राज्य सरकार संकलित है,वहीं सहकारी चीनी मिल्स संघ और सहकारी चीनी मिलों का काम मैन पावर के अभाव में चौपट हो रहा है।शुगर फेडरेशन और सहकारी चीनी मिलों को सेवानिवृत लोगों के हवाले कर दिया गया है। समय रहते शासन और जिम्मेदार अफसरों ने नही ध्यान दिया तो राज्य चीनी निगम की मिलों की तरह ही कही फेडरेशन की मिले भी एक एक करके बन्द न होने की नौबत में आ जायें।आला ओहदेदार आउट सोर्सिंग और सेवानिवृत्त लोगों को मनमाने ढंग से रखकर मिल संचालन का दिखावा कर इतिश्री कर रहे हैं। शुगर फेडरेशन के कर्मियों में इस बात को लेकर नाखुशी है। खाली पदों पर नियमित भर्ती की मांग उठती है किंतु हुकूमत तक आला हाकिम पहुचने नही देते हैं। सहकारी चीनी मिल्स संघ और चीनी मिलों में वर्तमान में करीब साढ़े आठ सौ पड़ खाली पड़े हैं और भर्ती नही की जा रही है। चीनी मिलों और शुगर फेडरेशन में प्रधान प्रबन्धकों यानि जीएम की कमी हो गयी है। मिलो का कामकाज भगवान भरोसे है। 31 मार्च तक संघ के अधीन चीनी मिलों, आसवनियो में जीएम के 33 पदों के सापेक्ष केवल तीन पर जीएम कार्यरत हैं जबकि30 खाली हैं। मुख्य अभियंता के 25 पदों के सापेक्ष 04 तैनात, डिप्टी चीफ इंजीनियर के 42 की जगह 19,एई (मेकैनिकल) 97 की जगह 38,एई (इलेक्ट्रिकल) 19 की जगह 10,आए (इंसरूमेन्टेशन) 09 की जगह 02,अवर अभियंता,सहायक अभियंता  सिविल 25 के बदले 12 काम कर रहे। सबसे खास बात अधिशासी अभियंता सिविल का केवल एक पद स्वीकृत है फेडरेशन में,वह भी खाली। मुख्य लेखाकार 25 के बदले तीन,उप मुख्य लेखाकार 32 की जगह 05,लेखाधिकारी 30 के बदले 09 वर्किंग में हैं।चीफ केमिस्ट 25 की जगह 04,उप मुख्य रसायनविद 41 की जगह 30,केमिस्ट 93 की जगह 52 और लैब इंचार्ज 25 की जगह 03 काम कर रहे हैं। इतना ही नही मुख्य गन्ना अधिकारी, उपमुख्य गन्ना अधिकारी, गन्ना अधिकारी, निरीक्षक,पर्यवेक्षक, आसवनी प्रबंधक,आसवनी केमिस्ट आदि पदों पर भी भारी कमी है। संघ मुख्यालय में भी बहुत पड़ खाली पड़े हैं। सेवानिवृत्त प्रधान प्रबन्धकों को आउटसोर्सिंग के तहत लगाया गया है, इतना ही नही एक-एक रिटायर्ड जीएम को दो-दो चीनी मिलों की जिम्मेदारी दी गई है। एक तो उम्र का चक्कर, ऊपर से वर्कलोड ,काम चलता नही सिर्फ घसीटा जा रहा है। सूत्रों की माने तो बीते पांच वर्षों में खाली पदों पर भर्ती खातिर कोई ठोस कार्यवाही नही की गई, जबकि अपर मुख्य सचिव गन्ना एवं चीनी उद्योग द्वारा आउटसोर्सिंग से जीएम,मुख्य लेखाकार,चीफ इंजीनियर, चीफ केमिस्ट को रखे जाने के लिए सात-आठ बार टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें कोई भी उपयुक्त अभ्यर्थी नही आया। है न हैरत और चिंता की बात। भर्तियों के लिए आईआईटी कानपुर, आईआईएम,शुगर इंस्टीट्यूट कानपुर एवं शासन के अधिकारियों की एक कमेटी गठित की थी। मिली जानकारी के मुताबिक साढ़े आठ सौ पड़ अधिकारी लेबल के और करीब 1100 पद चीनी मिलों में स्थानीय स्तर पर नियुक्ति लायक जैसे फिटर, इलेक्ट्रिशियन आदि पद रिक्त पड़े हैं।कुल 1900 पदों पर भर्ती नही हो पाई है। जब मैन पावर नही तो कम की उम्मीद शायद बेमानी या फिर ख्याली हो सकती है। आईएएस और पीसीएस अफसर व्यवस्था दे सकते हैं, मशीन नही चला सकते, मशीनों की आपरेटिंग टेक्निकल स्टाफ ही कर सकता है।फेडरेशन और मिलों के कारिंदों का कहना है कि यदि इन पदों पर तैनाती नही हुई तो भविष्य में चीनी मिल्स संघ की चीनी मिलो का चक्का जाम हो सकता है। वर्कर नही तो संचालन कैसा और कैसे ? बताया गया है कि चीनी मिलों के संचालन के लिये 09 पीसीएस अपर मुख्य सचिव स्तर से बुलाये गये,परन्तु चीनी के संचालन में दिक्कतें बरकरार है।इंजीनियर,केमिस्ट और लेखाकार इत्यादि न होने से टेक्निकल वर्क बाधित होने से कौन रोक पायेगा। पांच साल में चीनी मिलों का भट्ठा बैठ गया है। फेडरेशन और मिलों के भविष्य और गन्ना किसानों की सहूलियत के लिए नियुक्तियों से नकारा नही जा सकता है। सेवानिवृत्त होने की आयु निर्धारण करने वालों ने वर्किग इफिसियनसी यानि कार्य क्षमता में ह्रास को जरूर संज्ञान में लिया होगा अन्यथा आयु सीमा नियत न की जाती। आउटसोर्सिंग टेम्परेरी कामचलाऊ व्यवस्था हो सकती है स्थायी निदान नही।