जनपद में प्राइवेट नर्सिंग होमो में मौत का सौदागर बन गया है मुख्य चिकित्सा अधिकारी

यह कैसा जिला जहां नहीं थम रहा है नवजातो की मौतों का सिलसिला

डॉक्टर है या डकैत कब रुकेगा रिश्वत का टिकै

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा था कि यदि किसी भी अस्पताल में नियमों के विरुद्ध कार्य किया गया तो या फिर अनुभवहीन डॉक्टरों द्वारा मरीजों से संबंधित किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती गई तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी वाह संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी। स्वास्थ्य सचिव का यह निर्देश भले ही समूचे उत्तर प्रदेश में लागू होता नजर आ रहा हो किंतु इस जनपद में उनके निर्देशों की मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मालूम रहे कि फतेहपुर जनपद के शहर मे तांबेश्वर मंदिर के पास विकास हॉस्पिटल एवं प्रसव केंद्र में अन्नपूर्णा पत्नी रितुराज वर्मा उर्फ धर्मेंद्र निवासी ग्रामसभा बडौरी की आशा बहू ममता द्वारा 28 फरवरी को दोपहर 2 बजे प्रसव के लिए भर्ती कराया था किंतु 5 बजे तक प्रसव ना कराया गया तो उपरोक्त महिला के पेट में दर्द होने के बाद उसकी परेशानी बढ़ गई और अन्नपूर्णा के पिता मोहनलाल वर्मा ने विकास हॉस्पिटल एवं प्रसव केंद्र के संचालक विकास से फोन पर बात की और पूछा की 3 घंटे बीत जाने के बाद भी मेरी पुत्री का प्रसव क्यों ना कराया गया तो अस्पताल के संचालक विकास ने कहा कि हमारे पास सारी सुविधाएं उपलब्ध है और मशीनों की भी कमी नहीं है हम आपकी पुत्री का नॉर्मल प्रसव कराएंगे आप परेशान ना हो। इतना कहने के बाद रात्रि 12 बजकर 38 मिनट पर विषम परिस्थितियों में बिना किसी महिला सर्जन के जबरजस्ती प्रसव कराया गया पर जब महिला का प्रसव हुआ तो बच्चे के शरीर से कोई हरकत महसूस नहीं हो रही थी तब महिला के पति ऋतुराज सोनी और आशा बहू ममता द्वारा बिना किसी सुरक्षा के बिना ऑक्सीजन के मोटरसाइकिल से ले जाकर लगभग 20 मिनट के अंदर उमराव क्लीनिक अस्पताल में भर्ती कराया गया तो डॉक्टर उमराव ने बताया कि बच्चे के बचने की उम्मीद बहुत कम है क्योंकि बच्चा शरीर से कोई भी हरकत नहीं कर रहा है फिर भी हमने बच्चे को भर्ती कर लिया है तथा बचाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं और यदि बच्चे के शरीर में हरकत नहीं होती है तो 4 मार्च को अस्पताल से बच्चे को निकाल दिया जाएगा और उपचार के दौरान 6 मार्च को नवजात बच्चे की मृत्यु हो गई। महिला के पिता मोहनलाल वर्मा ने इस घटना की शिकायत शहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक को शिकायती पत्र देकर की है और उचित कार्यवाही करने की बात कही है। मालूम रहे कि आरोपित के पिता ने आरोप लगाते हुए बताया कि आशा बहुओं की प्रसव कराने के नाम पर अवैध मोटी रकम वसूलने के चलते नवजात शिशुओं को काल के गाल में समाहित करने का काम करने से पीछे नहीं हट रही हैं। हैरत की बात तो यह है कि नवजात शिशुओं की प्रसव के दौरान होने वाली मौतों का सौदागर बन गया है मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिसने रिश्वत के नाम पर भारी-भरकम रकम लेकर मानक विहीन और बिना डिग्री के अस्पतालों को संचालित करने की अनुमति प्रदान कर रखी है। यदि जनपद में यही आलम रहा तो प्राइवेट नर्सिंग होमो में मौतों का सिलसिला बराबर जारी रहेगा। जनपद के ऐसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी के खिलाफ हत्या का मुकदमा पंजीकृत करने के बाद जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना अति आवश्यक है।