महिला के खिलाफ छेड़छाड़ का मुकदमा दर्ज करने में फंसा दरोगा

मुरादाबाद। प्रतिशोध और वर्दी की हनक में पुलिस नियम-कायदे ताक में रखने से नहीं चूकती। रस्सी का सांप बनाने में माहिर पुलिसकर्मी कई बार बेगुनाहों को जेल भेजने में नहीं चूकते। कटघर थाने का एक ऐसा ही मामला पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसमें रिश्वत लेने के आरोप में साथी दरोगा के जेल जाने से खफा विवेचक ने एक महिला पर छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। महिला के पति ने जब हाईकोर्ट की शरण ली तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। 

फिलहाल मामला डीजीपी कार्यालय तक पहुंच गया है। वहीं आरोपी विवेचक का वेतन, प्रमोशन और इंक्रीमेंट रोक दिया गया है। पुलिसिया बाजीगरी के इस खेल की शुरुआत नोटबंदी के दौरान हुई थी। कटघर कोतवाली क्षेत्र के पीतलनगरी निवासी अनिल कुमार ने नोटबंदी के दौरान एलआईसी एजेंट सचिन कुमार को नोट बदलने के लिए दो लाख रुपए दिए थे। जिसके एवज में बाद में सचिन ने अनिल को दो लाख के चेक दिए, जो बाउंस हो गए। अनिल कुमार ने जब अपनी रकम मांगी तो सचिन ने उसे फंसाने की कोशिश कर दी। 14 अप्रैल 2017 को सचिन कुमार ने अनिल कुमार, उसकी पत्नी धनवती और उसके रिश्तेदार बैंक मैनेजर राजीव कुमार के खिलाफ कटघर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। जिसमें सचिन ने धनवती समेत सभी पर अपनी पत्नी के साथ घर में घुसकर छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। 

रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी अनिल कुमार को हुई तो उन्होंने तत्कालीन एसएसपी मनोज तिवारी से फरियाद लगाई। इसके बाद भी कटघर पुलिस ने अनिल को गिरफ्तार कर छेड़छाड़ के आरोप में जेल भेज दिया। अनिल के अनुसार जमानत पर आने के बाद उसने कटघर इंस्पेक्टर से मुलाकात कर पत्नी और रिश्तेदार बैंक मैनेजर के नाम मुकदमे से निकालने को कहा। जिस पर इंस्पेक्टर और विवेचक अजय कुमार ने 50 हजार रुपए की डिमांड की। अनिल ने नौ जून वर्ष 2017 को विवेचक अजय कुमार को 10 हजार रुपए दिए और एंटी करप्शन टीम से पकड़वा दिया। इस मामले में अजय कुमार के खिलाफ सिविल लाइंस कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।

बाद में अजय को विभाग से बर्खास्त कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण के बाद मामले की विवेचना एसआई रवि कुमार कादियान को दी गई। बताते हैं कि साथी दरोगा को जेल भिजवाने से खफा रवि कुमार ने अनिल की पत्नी धनवती को छेड़छाड़ का आरोपी बनाकर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। अनिल ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर दी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तत्कालीन एसएसपी को तलब करते हुए दरोगा की करतूत पर जमकर फटकार लगाई। लिहाजा एसएसपी ने इसकी जांच सीओ कोतवाली को सौंप दी।

 जांच आगे बढ़ने पर दरोगा रवि कुमार ने खुद को बचाने के लिए सीओ और इंस्पेक्टर को भी दोषी बता दिया। फिलहाल यह मामला डीजीपी कार्यालय तक पहुंच गया है। वहीं सीओ की जांच में दरोगा रवि कुमार को दोषी पाए जाने के बाद उनका वेतन, प्रमोशन और इंक्रीमेंट रोक दिया गया था। वहीं उसे परिनिंदा लेख से भी दंडित किया जा चुका है। अनिल कुमार ने पुलिसकर्मियों पर मानहानि का दावा करते हुए सीजेएम और हाईकोर्ट में वाद भी दायर कर दिया है।