॥ वो लम्हें ॥

वो लम्हें वो प्यार के प़ल

एक दुजै के हो चुके थे कल

छुप जाना है तेरी ऑचल में

बस जाना है आँखों की काजल में


याद आती है जब जब वो दिन

ताजा हो जाता है प्यार का जीन

वो रात रचाई थी जो रंगोली

हाथों में मेहन्दी की थी प्रेम की बोली


कभी रूठना और तुम्हें मनाना

एक दुजै के प्यार में संग संग खो जाना

कितना सुन्दर था वो प्यारा हर पल

जैसे अथाह सागर में मिल जाये मीठा जल


गुलशन में आ समय गुजारना

साँसों में एक दुजै का बस जाना

कहाँ छुप गया वो लम्हें वो  पल

चाँद भी तरसते थे देख कर कल


आ जाना उपवन में तुम आज

उड़ जायेगें नभ पे बन परवाज

कल रहे या ना रहे दिलबर

पूरा कर लेगें मोहब्बत की ये सफर


पलकों में तुम्हें बसा लुँगा मैं

जुल्फों की साये में शाम कर लूँगा मैं

गम की ना कोई छाया आ पाये

प्यार की रंगोली दिल में सजायें


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार