चार साल से जेल में बंद युवक ने दम तोड़ा

मुरादाबाद। चार साल से जेल में निरुद्ध बंदी की रहस्मय हालात में मौत हो गई। कारागार प्रशासन ने उसे जिला अस्पताल भिजवाया। जहां डाक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम में भी बंदी की मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। इसलिए बिसरा संरक्षित कर लिया गया है। अमरोहा जनपद के मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के गांव चुचौला कला निवासी 35 वर्षीय नरेश उर्फ मादीन नशेड़ी और आपराधिक प्रवृत्ति का था।

 उसके खिलाफ अमरोहा देहात, गजरौला, डिडौली के अलावा बिजनौर जनपद के नजीबाबाद थानों में लूट, चोरी, अवैध शस्त्र रखने और जानलेवा हमले के कई मुकदमे दर्ज थे। इनमें वह फरार चल रहा था। इसलिए अमरोहा और बिजनौर की अदालत से उसके खिलाफ वारंट जारी हो गए थे। तब मंडी धनौरा थाने की पुलिस ने उसे 17 मार्च 2017 को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था।

जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। तब से वह मुरादाबाद जिला जेल की बैरक नंबर 18 में बंद था। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे सीने में तेज दर्द होने पर उसे जेल के अस्पताल में भर्ती कराया। आराम न होने पर कारागार प्रशासन ने उसे जिला अस्पताल भेजा, जहां 12 बजकर 40 मिनट पर उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने शव को मोर्चरी में रखवा दिया था। जेल प्रशासन ने बंदी की मौत की सूचना उसके परिजनों को दी। 

शुक्रवार को मृतक का बड़ा भाई भूदेव अन्य परिजनों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। बड़े भाई भूदेव ने बताया कि उनके परिवार में मां- प्रेमवती, पिता रामकुंवर, बहन कुंता और मिथलेश तथा दो छोटे भाई जगदीश और नरेश थे। मझले भाई जगदीश की वर्ष 2017 में धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। सबसे छोटा नरेश गलत सोहबत में पड़ने के कारण नशा करने लगा था।

 इसके लिए वह चोरी-चकारी भी करता था। उसका विवाह मुरादाबाद के कटघर थानाक्षेत्र के गांव मछरिया निवासी ममता के साथ हुआ था। मगर जब ममता को उसकी असलियत का पता लग गया था। वर्ष 2017 में जब नरेश जेल गया तो उसके कुछ दिन बाद ही ममता भी अपने मायके चली गई। इसके बाद ममता ने कभी पलट कर नहीं देखा। भूदेव के अनुसार उन्होंने भी ममता से कभी संपर्क करने का प्रयास नहीं किया। वर्ष 2019 में लॉकडाउन से पहले उनकी मुलाकात नरेश से हुई थी। इसके बाद उन्होंने आज उसकी सूरत देखी है।