मेरे इस गुमान का कोई तो हमसफ़र होता..

यूं तो खुद से भी रूबरू हुई हूं मैं कई बार

पर खुद से ही "छूटी" थी, जाना तो होता !!


हां, तुम ये जो सज़ा दे जाते हो मुस्कराने की

अच्छा था एक बार, जी भर रोने दिया होता !!


क्या कमी है इस आसमान में चांद-तारों की

वो "टूटा हुआ तारा" ही अगर मेरा हुआ होता !!


माना वश नहीं है अब जिंदगी के फैसलों पर

पर एक बार "कहा" मेरा कभी तो सुना होता !!


जिंदगी ,मैं खुश हूं, कहीं कोई तो है "मेरा" भी

पर मेरे इस गुमान का कोई तो हमसफ़र होता !!


नमिता गुप्ता "मनसी"

मेरठ , उत्तर प्रदेश