Assembly Election Results 2022: जानें, इन हाई प्रोफाइल सीटों पर अब तक के रुझान में कौन है आगे और कौन है पीछे

नई दिल्ली : इंतजार की घड़ियां खत्म होने को हैं। आज पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजे सबके सामने होंगे। इस चुनाव में कुछ चर्चित सीटें हैं जिन पर सबकी निगाहें हैं। हम आपको ऐसी ही 20 बड़ी सीटों के बारे में बता रहे हैं कि इन पर कौन आगे चल रहा है और कौन पीछे।  

गोरखपुर शहरी : सीएम योगी आदित्यनाथ - (आगे )

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर शहरी सीट से आगे चल रहे हैं। सीएम योगी के खिलाफ आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने ताल ठोकी है। इसके अलावा समाजवादी पार्टी ने सुभावती शुक्ला और बहुजन समाज पार्टी ने ख्वाजा शमसुद्दीन को मैदान में उतारा है। कांग्रेस की तरफ से डॉ. चेतना पांडेय को प्रत्याशी बनाया गया है। 2017 में यहां से भाजपा के डॉ. राधामोहन जीते थे। 

करहल : सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव - (आगे) 

मैनपुरी जिले की करहल सीट इस चुनाव के दौरान काफी चर्चित रही। यहां से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव खुद मैदान में उतरे हैं और रुझान में आगे चल रहे हैं। उनके खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय राज्यमंत्री और एक जमाने में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खास रहे प्रो. एसपी सिंह बघेल को मैदान में उतारा। बघेल मुलायम सिंह के पीएसओ भी रह चुके हैं। 2017 में यहां से समाजवादी पार्टी के सोबरन सिंह यादव ने भाजपा की रमा शाक्य को हराया था।  

सिराथू : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (पीछे)

कौशांबी की सिराथू सीट से उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य चुनाव लड़ रहे हैं। केशव के खिलाफ बहुजन समाज पार्टी ने मुनसब अली को उम्मीदवार बनाया है, वहीं समाजवादी पार्टी ने पटेल बिरादरी की पल्लवी पटेल को टिकट दिया। सिराथू में पटेल वोटर्स की भूमिका काफी निर्णायक है। ऐसे में केशव प्रसाद मौर्य के सामने बड़ी चुनौती है। 

रामपुर : सपा नेता आजम खां (आगे)

करीब दो साल से जेल में बंद लोकसभा सांसद और कद्दावर नेता आजम खान को समाजवादी पार्टी ने यहां से उम्मीदवार बनाया। आजम खान के खिलाफ 103 मुकदमे दर्ज हैं। आजम के खिलाफ भाजपा ने आकाश सक्सेना उर्फ हनी को टिकट दिया है। बसपा ने यहां से सदाकत हुसैन और कांग्रेस ने काजिम अली खान को उम्मीदवार बनाया। 

आगरा ग्रामीण : पूर्व राज्यपाल बेबीरानी मौर्या (आगे) 

यह सीट इस चुनाव में खासी चर्चा में रही। यहां से भाजपा ने बेबीरानी मौर्या को टिकट दिया। बेबीरानी उत्तराखंड की राज्यपाल थीं। कुछ समय पहले ही भाजपा ने उन्हें वापस संगठन की जिम्मेदारी दे दी। फिर आगरा ग्रामीण से चुनाव के मैदान में उतारा गया। सपा-रालोद गठबंधन की तरफ से महेश कुमार जाटव को यहां से उम्मीदवार बनाया गया है। बसपा ने किरण प्रभा केसरी और कांग्रेस ने उपेंद्र सिंह को प्रत्याशी बनाया। 

जसवंतनगर : प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव (पीछे)

इटावा की जसवंतनगर सीट भी हाई प्रोफाइल है। यहां से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपने चाचा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को मैदान में उतारा। 2017 में हुए मनमुटाव के बाद अब दोनों के बीच काफी कुछ ठीक होता दिखाई दे रहा है। भाजपा ने यहां से विवेक शाक्य को प्रत्याशी बनाया है। बसपा की तरफ से ब्रजेंद्र प्रताप सिंह मैदान में उतरे। 

कन्नौज: पूर्व पुलिस कमिश्नर असीम अरुण (आगे) 

कन्नौज में पूर्व पुलिस कमिश्नर की साख दांव पर है। चुनाव से ठीक पहले इत्र नगरी कन्नौज पूरे देश में चर्चा का केंद्र बनी रही। यहां से भाजपा ने कानपुर के पुलिस कमिश्नर रहे असीम अरुण को टिकट देकर बड़ा दांव चला। वहीं, समाजवादी पार्टी ने यहां से अनिल दोहरे को मैदान में उतारा।  

सरोजनी नगर : पूर्व ईडी जॉइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह (पीछे)

लखनऊ की सरोजनी नगर सीट इस बार बेहद चर्चित रही। यहां से भाजपा ने ईडी के जॉइंट डायरेक्टर रहे राजेश्वर सिंह को मैदान में उतारा। राजेश्वर वीआरएस लेकर भाजपा में शामिल हुए थे। उन्हें टिकट देने के लिए भाजपा ने योगी सरकार में मंत्री स्वाति सिंह का टिकट काट दिया। राजेश्वर सिंह के खिलाफ समाजवादी पार्टी ने अभिषेक मिश्र को मैदान में उतारा, जो सपा सरकार में मंत्री रह चुके हैं। बसपा ने मोहम्मद जलीस खान और कांग्रेस ने रुद्र दमन सिंह पर दांव खेला है।

फाजिलनगर : पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य - (पीछे) 

योगी सरकार में मंत्री रहे और सपा का दामन थामने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य कठिन लड़ाई में फंसे हैं। इस सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र कुशवाहा, उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं। दरअसल स्वामी का खेल बसपा ने बिगाड़ा है। बसपा ने इस सीट से इलियास अंसारी को प्रत्याशी बनाया है। इलियास पुराने समाजवादी हैं। सपा से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने भाजपा से आए स्वामी प्रसाद मौर्य को प्रत्याशी बना दिया है। इसी का नतीजा रहा कि इलियास ने बगावत कर दी और बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में कूद पड़े। बसपा प्रत्याशी जितना वोट पाएंगे, उसका नुकसान सपा प्रत्याशी को उठाना पड़ सकता है।

पंजाब की इन बड़ी सीटों पर सबकी नजरें 

भदौड़ और श्री चमकौर साहिब:  सीएम चरणजीत सिंह चन्नी (पीछे)

पंजाब कांग्रेस के मुख्यमंत्री चेहरे चरणजीत सिंह चन्नी दो विधानसभा क्षेत्रों श्री चमकौर साहिब और भदौड़ से चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव के दौरान स्टार प्रचारक के तौर उनकी मांग लगातार बनी रही थी। वह हर वर्ग को साधने की कोशिश में लगे रहे।  

जलालाबाद:  पूर्व सीएम सुखबीर बादल (आगे) 

जलालाबाद से 15 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से सबसे बड़ा चेहरा अकाली-बसपा गठजोड़ के सीएम चेहरे सुखबीर हैं। कांग्रेस ने मोहन सिंह फलियांवाल और आम आदमी पार्टी ने जगदीप कंबोज को टिकट दिया है।  

लंबी : पू्र्व सीएम प्रकाश सिंह बादल (पीछे)

पंजाब के पांच बार सीएम रह चुके प्रकाश सिंह बादल भी 94 की उम्र में भी चुनाव मैदान में हैं। वह फिर लंबी से किस्मत आजमा रहे हैं। बादल देश के सबसे वयोवृद्ध नेताओं में शामिल हैं। संभवतः वह पंजाब में अब तक के सबसे उम्रदराज प्रत्याशी हैं। आप ने गुरमीत खुडि्डयां और कांग्रेस ने जगपाल सिंह अबुलखुराना को चुनाव मैदान में उतारा है।  

अमृतसर ईस्ट : पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू (पीछे)

पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू और अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया के चुनाव लड़ने की वजह से यह सीट चर्चा में है। यहां भाजपा गठबंधन ने जगमोहन सिंह राजू को उम्मीदवार बनाया है। राजू तमिलनाडु कैडर के आईएएस थे। चुनाव से पहले ही उन्होंने वीआरएस लेकर राजनीति में एंट्री ली। यह सीट सिद्धू व मजीठिया के आमने-सामने होने का कारण चर्चा में है। दोनों नेता अब तक कोई भी विधानसभा चुनाव नहीं हारे हैं। इस सीट पर हिंदू वोट काफी हैं।

धुरी पटियाला  आप नेता भगवंत मान (आगे) 

यहां से आम आदमी पार्टी के सीएम चेहरे भगवंत मान चुनाव लड़ रहे हैं। कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। अकाली दल ने प्रकाश चंद गर्ग और कांग्रेस ने दलवीर सिंह गोल्डी को टिकट दिया है। एग्जिट पोल में आप को बहुमत के अनुमान ने यहां का नतीजा दिलचस्प बना दिया है।

पटियाला शहर: पूर्व सीएम अमरिंदर सिंह  (पीछे)

पटियाला शहर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। यहां कुल 17 उम्मीदवार मैदान में हैं। आप ने पूर्व मेयर अजीतपाल कोहली और कांग्रेस ने पूर्व मेयर विष्णु शर्मा को यहां से टिकट दिया है। कांग्रेस से अलग होने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी पंजाब लोक कांग्रेस पार्टी बनाई है। कैप्टन की पार्टी का भाजपा के साथ गठबंधन है। इस बार का चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। यह चुनाव उनकी भविष्य की राजनीति को तय करेगा। 

उत्तराखंड की हॉट सीटें 

खटीमा: सीएम पुष्कर सिंह धामी  (पीछे) 

उत्तराखंड की खटीमा विधानसभा सीट से सीएम पुष्कम सिंह धामी उम्मीदवार हैं। धामी को भाजपा हाईकमान ने अचानक ही सीएम घोषित कर हर किसी को चौंका दिया था। उन पर भाजपा को दोबारा सत्ता में लाने की बड़ी चुनौती है। इस लिहाज से इस सीट के नतीजे पर सब की नजरें हैं। 

लालकुआं: पूर्व सीएम हरीश रावत  (पीछे) 

काफी ऊहापोह के बाद आखिरकार हरीश रावत ने उत्तराखंड की लालकुआं सीट से चुनाव मैदान में उतरे। सीएम चेहरे का एलान नहीं करने पर कांग्रेस हाईकमान से उनकी खटपट हुई और उन्होंने संन्यास लेने का संकेत दे दिया था। इसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने उनकी सुध ली और वह पूरे जोश के साथ मैदान में उतरे। इसी के साथ प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने पर मुख्यमंत्री को लेकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सुर बदल गए। उनका कहना था कि हाईकमान ही तय करेगा कि मुख्यमंत्री कौन होगा। मतदान खत्म होने के बाद हरीश रावत ने कहा था कि पार्टी की सरकार बनने पर वह या तो मुख्यमंत्री बनेंगे या घर बैठ जाएंगे।

गंगोत्री: अजय कोठियाल - (पीछे)  

उत्तराखंड चुनाव में इस बार आम आदमी पार्टी भी ताल ठोक रही है। आप ने कर्नल (रि.) अजय कोठियाल को सीएम उम्मीदवार बनाते हुए उत्तरकाशी के गंगोत्री से टिकट दिया था। कोठियाल ने सेना में 26 साल तक सेवा दी है। इस दौरान उन्हें कई मेडल से नवाजा गया। कर्नल कोठियाल ने केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों में सराहनीय योगदान दिया। वह वर्तमान में देहरादून में रहते हैं।

गोवा की हाई प्रोफाइल सीटें 

संक्वेलिम : सीएम प्रमोद सावंत (आगे)  

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत एक बार फिर उत्तरी गोवा के संक्वेलिम से चुनाव मैदान में उतरे हैं। वह इस क्षेत्र में दो बार चुने गए हैं। राजनीति में आने से पूर्व उन्हें किसी प्रकार का कोई अनुभव नहीं था। डॉ सावंत को गोवा के दिवंगत मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का कट्टर समर्थक माना जाता रहा है। मनोहर पर्रिकर ने उन्हें गोवा विधानसभा अध्यक्ष का बनाने के लिए अपना पूरा समर्थन दिया था।   

पणजी: उत्पल पर्रिकर (पीछे) 

गोवा चुनाव में इस बार पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। वह गोवा की पणजी सीट से निर्दलीय ही मैदान में उतरे हैं और अब तक के रुझान में आगे चल रहे हैं। उनकी लंबे समय भाजपा के साथ तनातनी चलती रही और बात नहीं बनने पर उन्होंने अलग चुनाव लड़ने का फैसला ले लिया। पूर्व सीएम के पुत्र होने के नाते इस सीट के नतीजे पर सभी की नजरें हैं। 

हेनगांग (मणिपुर) : सीएम एन बीरेन सिंह (आगे) 

एन बीरेन सिंह मणिपुर के बड़े राजनीतिक चेहरों में से एक हैं। एन बीरेन सिंह ने मणिपुर की हेनगांग सीट पर साल 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। इस सीट पर वह लगातार चार बार से विधायक हैं। पांचवीं बार वह फिर इस सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। एन बीरेन सिंह का पूरा नाम नोंगथोम्बम बीरेन सिंह है और वह राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ी भी रह चुके हैं।