Uttarakhand election 2022: इन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला, BJP- कांग्रेस की राह नहीं आसान

उत्तराखंड : उत्तराखंड में उत्तराकाशी जिले की तीन में से दो सीटों गंगोत्री और यमुनोत्री पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होने जा रहा है। गंगोत्री में आप तो यमुनोत्री में निर्दलीय की उपस्थिति से कांटे की टक्कर होने के आसार है। इससे प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा और कांग्रेस के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी। 

जनपद की तीन विधानसभा सीटों गंगोत्री, यमुनोत्री व पुरोला में इस बार राजनैतिक समीकरण बदले हुए हैं। गंगोत्री सीट पर आम आदमी पार्टी ने सीएम चेहरा रिटायर्ड कर्नल अजय कोठियाल को प्रत्याशी बनाया है। आप की मजबूती यहां उसकी आईटी टीम के साथ गंगोत्री विस क्षेत्र कोठियाल की कर्मस्थली होना है। पार्टी का फोकस सीट पर आधे के करीब महिला वोटरों पर हैं।

आप महिलाओं के वोट पाने में सफल होती है, तो जीत का अंतर कम होने से कांटे की टक्कर होगी। जिससे भाजपा प्रत्याशी सुरेश चौहान और कांग्रेस से विजयपाल सजवाण की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि, भाजपा को यहां अपने सांगठनिक ढांचे पर भरोसा है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी के पास चुनाव में दो बार जीत का अनुभव है।

उधर, यमुनोत्री सीट पर कांग्रेस से टिकट कटने पर पार्टी के ओबीसी मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय डोभाल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि भाजपा से निवर्तमान विधायक केदार सिंह रावत और कांग्रेस से दीपक बिजल्वाण चुनाव मैदान में है। लेकिन कांग्रेस के टिकट से पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे संजय डोभाल की उपस्थिति से यहां भी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

पुरोला में भाजपा और कांग्रेस में सीधी टक्कर है। यहां भाजपा से दुर्गेश्वर लाल और कांग्रेस से मालचंद प्रत्याशी हैं। मालचंद के पास भी दो बार जीत का अनुभव है। वहीं दुर्गेश्वर पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। इस बार मालचंद के सामने राजनैतिक विरासत बचाने तो दुर्गेश्वर के सामने राजनैतिक भविष्य बनाने की चुुनौती है। 

दोनों सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला नया नहीं है। गंगोत्री में वर्ष 2002 के पहले चुनाव के बाद ऐसा दूसरा मौका है। वर्ष 2002 में भाजपा, कांग्रेस व सीपीआई के बीच कांटे की टक्कर रही थी, जिसमें कांग्रेस ने 610 वोट के अंतर से भाकपा को हराया था। वहीं यमुनोत्री में त्रिकोणीय मुकाबला नया नहीं है। यहां यूकेडी के मजबूत होने से वर्ष 2002, 2007 और 2012 में तीन बार त्रिकोणीय मुकाबला हो चुका है।