लेखन एक खुमारी

लेखन एक खुमारी है

आदत बड़ी भारी है

बिना लिखे चैन नहीं

शब्दों से तारतम्य  नहीं।


लेखन एक खुमारी है

नशे सी आदत भारी है

चाहिए बस एक लेखक को

लेखनी उसकी चलती रहे


लेखन एक खुमारी है

अपने में ही खोया रहता

शब्दों से ही बातें करता

ताना-बाना उनका बुनता।


लेखन एक खुमारी है

खुशी या गम जमाने के पिरोता

शब्दों की वह माला गुंथता

कुछ कहे कुछ यूं ही सुनते।


लेखन एक बीमारी है

पैसे की कोई चाह नहीं

शाह पन्ने करे रात दिन

लाल ,नीले ,काले करते।


लेखन एक खुमारी है

समझे ना कोई इस बात को

वाह वाह पाठक से चाहे।

बस उसे सुन थोड़ा मुस्कुराए।


लेखन एक बीमारी है

कभी तुम्हें हसाएं

थोड़ा सा तुम्हें गुदगुदाएं

अपना तुम्हें बनाए।


सच कहा लेखन एक बीमारी

सुबह से शाम उस पर भारी

बिना लिखे नींद न आए

न लिखूं तो मन घबराए

कुछ अधूरा सा छूटा जाएं।।


           रचनाकार ✍️

           मधु अरोरा