सामुदायिक शौंचालय के नाम पर ग्रामों में सरकारी धन का हो रहा जमकर बंदरबांट


स्वच्छ भारत मिशन और खुले में शौच पर प्रतिबंध का दावा हवा हवाई                                                                  

हलधर मऊ (गोंडा)। प्रदेश में जहां एक तरफ सरकार द्वारा लाखों रुपयों खर्च कर प्रत्येक ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया ताकि लोगों को खुले में शौंच से मुक्ति मिले। साथ ही शौचालय की देखरेख हेतु स्वयं सहायता समूह को प्रति माह नौ हजार रुपये की धनराशि भी निर्गत की जा रही है। परन्तु ठीक उसके विपरीत जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मालूम हो कि शौचालय के नाम पर ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव द्वारा जमकर शासकीय धन का गबन कर बंदरबांट किया जा रहा है। वहीं समीक्षा के दौरान सरकारी कागजों में शौचालय को पूर्ण दर्शाकर प्रदेश सरकार के मंत्री को गुमराह भी किया जा चुका है। जी हां हम बात कर रहे हैं विकास खंड हलधरमऊ की,जहाँ सामुदायिक शौंचालय के नाम पर बड़े पैमाने पर शासकीय धन गबन करने का मामला प्रकाश में आया है। जमीनी हकीकत देखने हेतु ग्राम पंचायत कलवारी के ग्रामीणों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि गांव में सामुदायिक शौचालय का निर्माण तो किया गया है परंतु अभी तक उसमे ताला जड़ा हुआ है। जिससे शौचालय निरंतर बंद होने से गांव के लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। जबकि आपको बता दें कि विगत माह जनवरी में ग्रामनिधि द्वारा उक्त शौचालय के रखरखाव व साफ सफ़ाई हेतु स्वयं सहायता समूह को 63 हज़ार रुपये का भुगतान किया जा चुका है। कुछ इसी तरह का मामला ग्राम पंचायत असरना का है जहाँ कई ग्रामीणों ने ख़ासकर महिलाओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि शौचालय तो बनाकर खड़ा कर दिया गया परन्तु न तो उसमें पानी की सुविधा है और न साफ सफाई की कोई व्यवस्था है। महिलाओं ने कहा कि योगी बाबा ने शौचालय बनवाया था ताकि गांव की बहू बेटियां खुले में शौच न जाएं लेकिन शौचालय की व्यवस्था ठीक न होने से हमारे घरों की बहू -बेटियां खुले में शौच करने को मजबूर हैं। यहां भी हर माह स्वयं सहायता समूह को शौचालय के रखरखाव व साफ सफाई हेतु प्रति माह नौ हजार रुपये का भुगतान किया जाता है।  लेकिन आज तक समूह के किसी सदस्य ने शौचालय की देखभाल नही की है। ग्राम पंचायत डुड़ही में अर्द्धनिर्मित शौचालय से अधिकारीगणों पर सवालिया निशान खड़ा हो रहा है। शौचालय का टैंक (गड्ढा) तक नहीं बनाया गया है और इसे भी स्वयं सहायता समूह को हैंड ओवर कर इनके खाते में सरकारी धन निर्गत कर दिया गया है। उपरोक्त्त तीनो गांव के निवासियों ने बताया कि सरकार ने हमारी सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च कर शौचालय का निर्माण तो करा दिया लेकिन अधिकारियों की संवेदनहीनता के चलते हम लोग सुविधा से वंचित हैं। जिससे सरकार का स्वच्छ भारत मिशन और खुले में शौच पर प्रतिबंध का दावा हवा हवाई साबित हो रहा है।