बैंक घोटाला

बैंक लूटो, विदेश भागो, आखिर ये हो क्या रहा है ?

अब तक हजारों करोड़ की हो गई लूट, सबक और कार्यवाही जस की तस

भारतीय अर्थवस्था के सम्बल व सुदृढ़ीकरण में बैंकों की मुख्य भूमिका रही है । बैंक प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख व महत्वपूर्ण हिस्सा होती है । बैंक एक ऐसा माध्यम है जहां हर एक आम से लेकर खास तक अपनी आमदनी से कुछ हिस्सा अपने सुरक्षित भविष्य के लिए बचत करता है । और यह पूर्ण विश्वास व भरोसा रखता है कि उसका धन सुरक्षित रहेगा और उसे जरूरत पर मिल सकेगा । परन्तु देश में आए दिन हो रहे बैंक घोटालों से आमजन में बैंकों के प्रति विश्वास व भरोसा डगमगाता जा रहा है । जी, हां, नीरव मोदी की बैंक लूट को पीछे छोड़ने वाला यह बैंक घोटाला सामने आते ही देश भर में हडकंप का माहौल है । जिसमें एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड ने 28 बैंकों के एक संघ के साथ 28,842 करोड़ रूपये से अधिक की धोखाधड़ी कर दी ।

  देश की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 8 नवंबर, 2019 को पहली बार शिकायत दर्ज कराई । जिस पर सीबीआई ने 12 मार्च, 2020 को कंपनी से जवाब मांगा । इसके लगभग पांच महीने बाद कंपनी ने नए सिरे से शिकायत दर्ज कराई । जिसमें 18 महीने की जांच के बाद सीबीआई ने सात फरवरी 2022 को शिकायत दर्ज कराई। हालंकि एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड व उसके चेयरमैन व प्रबंध निदेशक ऋषि अग्रवाल व उसके निदेशकों पर एसबीआई के नेतृत्व वाले 28 बैंकों के समूह से 22,842 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। इस घोटाले को देश में बैंकिंग इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है । वहीं कम्पनी से जुड़े प्रबंध निदेशक ऋषि अग्रवाल व अन्य लोग रूपयें सहित विदेश भाग चुके है । एबीजी शिपयार्ड पर एसबीआई का 2,925 करोड़ रुपये, आईसीआईसीआई बैंक का 7,089 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक का 3,634 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा का 1,614 करोड़ रुपये, पीएनबी का 1,244 करोड़ रुपये और इंडियन ओवरसीज बैंक का 1,228 करोड़ रुपये बकाया है ।

  बैंक धोखाधड़ी का यह पहला मामला नहीं है. इसके पहले भी कई बैंकिंग घोटाले सामने आते रहे हैं । देश में कई वर्षाें से बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा भारतीय बैंकिंग प्रणाली को चूना लगाने का यहां कोई नया खेल नही है । विशेषकर पिछले कुछ वर्षाें में बैंकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी के कई मामले प्रकाश में आ रहे है ।

इन तमाम घोटालों व धोखाधड़ी मामलों में अमूमन यह देखने में आया है कि बैंकों से देश का खून-पसीने का धन ऋण लेकर विदेशों की बैंक में जमा कर विदेश भाग जाने का एक चलन-सा हो गया है । बैक लूटो और विदेश भागो का यह हथकण्डा आखिर कब बन्द होगा ? और बैंक के साथ हो रहे बड़े-बड़े फ्रॉड कब रूकेंगें ? ठीक इसके उल्टे आम आदमी को महज एक-दो लाख के ऋण के लिए तो बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है, बैंकों के कई-कई चक्कर काटने व अधिकारियों से मन्नतें करनी पड़ती है । देश में अब तक बैंक घोटाले हजारों करोड़ से बाहर जा चुके है परन्तु भारतीय व्यवस्था में इस नकेल व राकेथाम को लेकर कोई प्रभावी कार्यवाही होती नजर नही आ रही है । ऐसे मामलों में दोषी अधिकारियों एवं व्यक्तियों पर सख्त कार्यवाही बेहद जरूरी हो गई है ।  

मुकेश बोहरा अमन

बाड़मेर राजस्थान