मानवता

जीवों पर करना दया,

मानवता है लोग।

भूखों को खाना खिला,

सभी भागते रोग।।


मानवता जग में बड़ी,

गीता कहती आज।

इस गुण को मत त्यागिये,

सबको होगा नाज।।


बडे़ बुजुर्गों का सदा,

लेना आशीर्वाद।

मानवता का कर्म यह,

लोग करेंगे याद।।


स्व-स्व की इस होड़ में,

मानवता घबराय।

परहित को सोचे नहीं,

कौन इन्हें समझाय।।


नेह दया सेवा क्षमा,

मानवता गुण जान।

जिस मानव में हो बसे,

मिले उसे सम्मान।।


मानवता को संग में,

लिए चलो इंसान।

हो सकता इस राह पर,

मिल जाये भगवान।।


गीता देवी

औरैया, उत्तर प्रदेश