- तीखा तीर -

भूलो  कल  की  बाते 

जो  हो   गयीं  पुरानी 

नये  दौर   की  सोचो 

गाँवो  से नई  कहानी 

गांव   से  रख  पायेंगे 

निंव सच्ची नई सुहानी 

--- वीरेन्द्र  तोमर