यह सुबह की बात है

आज दिन में रात है, यह सुबह की बात है ।

कुर्सियों की ताक में, स्वार्थ की शुरुआत है ।।


मतलबी, मौका-परस्ती , आदमी की जात है ।

झूठ और पाखंड की , जिंदगी बारात है ।।


कौम के न काज के ये, पीढ़ियों पर घात है ।

पद पिताजी बन रहे, कुर्सियां सब मात है ।।


चंद सिक्को का सहारा, झूठ की औकात है ।

कल उगेगा ये भरोसा, सब तुम्हारे हाथ है ।।


झूठ आखिर झूठ होगा, सौ टका सही बात है ।

सत्य का डंका बजेगा, सच अमन के साथ है ।।


मुकेश बोहरा अमन

बाड़मेर राजस्थान