सजे पांडालों में विराजीं मां सरस्वती, विधि-विधान से हुई पूजा मस्ती में थिरके लोग

(गौरीशंकर पाण्डेय सरस) जखनियां/गाज़ीपुर। तहसील क्षेत्र के गांवों कस्बों और बाजारों में श्रद्धाऔर विश्वास के साथ ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती पांडालों में विराजमान हुईं। वैदिक रीति रिवाज के साथ बैदिक मंत्रों के बीच देवी का मुख- पट मानिंद जनों द्वारा खोला गया।बजते डीजे सांग पर थिरकते नवयुवक और भजन कीर्तन  करते कलाकार अपनी कर्णप्रिय गीतों से भक्ति का रस घोल रहे थे। विदित हो कि श्रृष्टि रचना की महति भूमिका को सार्थक स्वरूप देने वाली वीणा वादिनि मां सरस्वती विधाता की बामानगिनि को संसार का स्वरबोध‌ धात्री भी कहा गया है। जिनका अवतरण धराधाम पर प्रकृति की मनमोहक छंटा के बीच माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था।जब शीतल मन्द हवा के अविरल मादक गंध सुगंध के बीच बासंतिक मधुमास का अहसास कराता खुशनुमा मौसम अपने आप में अद्भुत और अद्वितीय लगने लगता है।खास बात यह है कि बसंत पंचमी तिथि से  होली गीतों की चहक फिज़ा में रस घोलने लगती है। क्या बूढा क्या जवान सबके सब गाने में उतावले नजर आने लगते हैं।चौपाल पर झाल की झंकार और ढोलक की थाप पर गूंजते चौताल और झूमर संग फाग का लहरा बेमिसाल बन जाता है।यह‌ कार्यक्रम देर रात तक चलता है।