सपने सब पूरे हो मन के

सपने सब पूरे हो मन  के

उत्तरे ठोस धरातल पर

कर्मों की सुंदर बेदी बना

मेहनत की उसमें अग्न जला।

सपने सब पूरे हो मन के

क्रोध, ईष्र्या ,लालच

की समिधा बना

आओ उनकी आहुति दें।

सपने सब पूरे हो मन के

खुली आंखों से सपने देखें

आगे चलने की राह बनाएं

मन में हौसलों की उड़ान।

सपने सब पूरे हो मन के

स्वस्थ रहे सब सुखी रहे

आपस में प्रेम सब करते रहे

जात  पात का बंधन छोड़ें।

सपने सब पूरे हो मन के

सोचे चलो हम तुम मिलकर

सत्य अहिंसा का प्रचार करें

सद्भाव मैत्री रहे हरमन में।

सपने सब पूरे हो मन के

बड़ों का सम्मान करें

देश हित में कुछ काम करें

सुंदर सपनों की उड़ान भरे।

सपने सब पूरे हो मन के

रोजगार मिले सभी को यहां

खुशियां चूमे हर घर को

राम-राज फिर वापस आए

सपने पूरे होंगे मन के।।

               रचनाकार ✍️

               मधु अरोरा