"माँ सरस्वती नमः"

माँ  सरस्वती, माँ शारदे,जय हो,हे! हंस वाहिनी।

धवल-धवल मन निर्मल करदो,हे! मात ज्ञान दायिनी।।

माँ के चरणों शीश झुकाऊँ,

माँ के चरणों मैं मुस्काऊँ,

माँ से वर पाकर हर्षित हो,

ज्ञान का दीपक मैं जलाऊँ,


ज्ञान की निर्मल धारा से,

पाप हरो पाप हारिणी।

धवल-धवल मन निर्मल कर दो हे मात ज्ञान दायिनी।।


शब्द-शब्द में अमृत भर दो,

मधुर-मधुर वाणी तुम कर दो,

अज्ञानी मैं वर दो ज्ञान का,

अपना हाथ शीश पर रख दो,


मन के तार झंझकृत कर दो,

जय हो, हे!जग तारिणी।

धवल-धवल मन निर्मल कर दो हे मात ज्ञान दायिनी।।


बाँह पकड़ लो मेरी माता,

मैं अज्ञानी कुछ नहीं आता,

 हे जगदाता विनती सुन लो,

 तेरा दर्शन  मुझको भाता,


भवदायिनी,हंसवाहिनी ,वर दो वीणा वरदानी।

धवल-धवल मन निर्मल कर दो,

हे ! मात ज्ञानदायिनी।।


डॉ० अनीता चौधरी