श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का व्याख्यान सुन श्रोता गदगद

बांदा। शहर के सर्वोदय नगर में श्रीमदभागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर कथावाचक आचार्य पंडित ज्ञानेंद्र मिश्र ने सुनाया कि  भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर चित्रण लोगों को सुनाया। भागवत आचार्य जी नेभगवान श्रीकृष्ण का जन्म वासुदेव और देवकी के गर्भ से कारगार में हुआ था। वासुदेव ने श्रीष्ण को गोकुल में यशोदा के यहां दे दिया था। जहां यशोदा ने अपने लल्ला कान्हा को बड़े ही लाड़ प्यार से पाला. भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही नटखट थे. जितना यशोदा मैया और नंद लाला उनके नटखट अंदाज से परेशान थे, उतना ही वहां के गांव वाले भी. कृष्ण जी अपने मित्रों के साथ मिलकर गांव वालों का माखन चुराकर खा जाते थे, जिसके बाद गांव वाले उनकी शिकायत मैया यशोदा के पास लेकर पहुंच जाते थे. इस वजह से उन्हें अपनी मैया से डांट भी खानी पड़ती थी. कालिया नाग का वध श्री कृष्ण की प्रचलित बाल लीलाओं में से एक है. एक बार श्री कृष्ण अपने मित्रों के साथ यमुना नदी के किनारे गेंद से खेल रहे थे. अचानक गेंद युमना नदी में चली गई और बाल गोपल के सारे मित्रों ने मिलकर उन्हें ही नदी से गेंद लाने को भेज दिया. बाल गोपाल भी एकदम से कदम्ब के पेड़ पर चढ़ कर यमुना में कूद गए. वहां उन्हें कालिया नाग मिला. श्री कृष्ण ने अपने भाई बलराम के साथ मिलकर जहरीले कालिया नाग का वध कर दिया। आज समाज में प्रतीकात्मक रूप से जगह-जगह कालिया नाग बैठे हुए हैं जिन्हें हमें पहचानना है और उनसे दूरी बना कर चलना है हमेशा अच्छे काम करिए लोगों की भलाई कर रही है गरीबों की मदद करिए असहाय की सहायता कीजिए वृद्धों की सेवा की कीजिए माता-पिता का सम्मान कीजिए इससे बड़ा भागवत कथा का कोई सार नहीं हो सकता। आज यजमान महेंद्र द्विवेदी व उनकी पत्नी रेखा रहे। भागवत में रामबाबू पांडेय, दिनेश शिवहरे, सुनीता शिवहरे, अजय द्विवेदी, नरेंद्र कुमार मिश्रा, बालकृष्ण यादव, श्याम बाबू आदि समस्त मोहल्लेवासियों ने भागवत कथा में संपूर्ण सहयोग और योगदान किया।