याद आता है बचपन

छुटपन में धूल-गारे में खेलना,

मिट्टी छुपाकर खाना,

मिट्टी मुंह पर लगाना,

मां की डांट-फटकार सुनना,

रूआंसा होने पर मां का प्यार भरा स्पर्श,

बहुत याद आता है बचपन।


आम के पेड़ पर चढ़ना चोरी से आम खाना,

खेत से गन्ने उखाड़कर चूसना,

खेत मालिक के आने पर नौ दो ग्यारह हो जाना,

चोरी-चिरौरी पकड़े जाने पर झूठ बोलना,

चीखना चिल्लाना शोर मचाना बच्चों संग,

बहुत याद आता है बचपन।


कबड्डी खो-खो गिल्ली डंडा खेलना,

छत पर जाकर पतंग उड़ाना,

बारिश में भीगना कागज की नाव बनाना,

पापा का साइकिल पर बैठाकर घुमाना,

दोस्तो के साथ साइकिल सीखना गिरना लड़खड़ाकर ,

बहुत याद आता है बचपन।


रेलगाड़ी गाड़ी को देखकर उछलना खुश होना,

तुतला-तुतलाकर बोलना अपनी बातें मनवाना,

दादा-दादी नाना-नानी का किस्से-कहानियां सुनाना,

पट्टी पर लिख-लिखकर याद करना मिटाना,

कुछ नया सीखना नये-नये प्रयोग करना हर पल,

बहुत याद आता है बचपन।


बचपन की गलतियों शैतानियों को याद करना,

याद करते करते कभी हंसना कभी आंसू बहाना,

भाई बहनों से लड़ना झगड़ना रूठना फिर मान जाना,

घूमना फिरना मस्ती करना नये-नये दोस्त बनाना,

कामिक्स पढ़ना किताबों में छुपाकर,

बहुत याद आता है बचपन।


खुले आसमान के नीचे सोना,

चांद तारो से बाते करना,

मीठे-मीठे सपनो में खो जाना,

तितलियों के पीछे भागना,

चिड़ियों की तरह चहकना हरदम,

बहुत याद आता है बचपन।


प्रियंका पांडेय त्रिपाठी

प्रयागराज उत्तर प्रदेश