झारखंड में अलग-अलग दिन होगी मैट्रिक व इंटर की परीक्षा

झारखंड में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा के आयोजन को लेकर संशय खत्म हो गया है। स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल को निर्देश दे दिया है कि एक ही टर्म में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं लें। शिक्षा सचिव राजेश कुमार शर्मा ने जैक के सचिव महिप कुमार सिंह को सोमवार को इसका पत्र भेज दिया है। अब जैक जल्द ही परीक्षा की तारीख घोषित करेगा। मैट्रिक और इंटर की परीक्षा इस बार अलग-अलग दिन होगी।

शिक्षा सचिव राजेश कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के 17 जिलों में पहली से 12वीं और सात जिलों में नौवीं से 12वीं के स्कूल संचालन की अनुमति दी है। इसका संबंधित जिलों में पालन किया जा रहा है। साथ ही, स्कूलों में ऑफलाइन परीक्षा लेने का भी निर्देश दिया गया है। ऐसे में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की वार्षिक परीक्षा का आयोजन किया जाना है। शिक्षा सचिव ने निर्देश दिया है कि मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं मार्च के अंतिम सप्ताह से अनिवार्य रूप से शुरू कर दी जाए। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की हर विषय की परीक्षाओं में कम से कम एक दिन का अंतराल होना आवश्यक रहेगा। वहीं, अगले डेढ़ घंटे में सब्जेक्टिव सवाल होंगे।

जिनके उत्तर उत्तरपुस्तिका पर लिखने होंगे। छात्र-छात्राओं को विषवार मूल्यांकन व परिणाम, दोनों यूनिट, आंतरिक मूल्यांकन व प्रायोगिक परीक्षा के अंक के आधार पर अंतिम रिजल्ट जारी किया जाएगा।

नए सिरे से तैयार होंगे प्रश्न पत्र

मैट्रिक व इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए अब नए सिरे से प्रश्न पत्र तैयार करने का मॉड्यूल जारी किया जाएगा। ऑब्जेक्टिव प्रश्नों का मॉडल प्रश्न पत्र जारी हो चुका था अब सब्जेक्टिव प्रश्नों का भी मॉडल प्रश्न पत्र जारी किया जाएगा। सोमवार को राज्य के विभिन्न विषयों के प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए चयनित शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रेनिंग हुई। शिक्षकों को नए रूप में प्रश्न पत्र तैयार करने का निर्देश दिया गया है

मई में होने वाली परीक्षा मार्च से ही

मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं सिलेबस में 25 फीसदी कटौती के बाद इस बार दो टर्म में होनी थी। 75 फीसदी पाठ्यक्रम में से आधे पर पहला टर्म एक से 15 दिसंबर 2021 तक होना था, जिसमें ओएमआर शीट पर आब्जेक्टिव प्रश्न पूछे जाने थे। वहीं, बचे आधे सिलेबस में से दूसरा टर्म एक से 15 मई तक लिखित रूप में होना था। इसमें अतिलघुउत्तरीय से लेकर दीर्घ उत्तरीय तक प्रश्न पूछे जाने थे। पहला टर्म नहीं हो सका तो राज्य सरकार ने दोनों टर्म की परीक्षा अब एक साथ लेने का निर्णय ले लिया है। जो परीक्षाएं मई में होनी थी वह भी अब मार्च से ही शुरू हो जाएंगी। ऐसे में मैट्रिक और इंटरमीडिएट के सिलेबस पूरा करने की शिक्षकों के पास चुनौती होगी।