बेहतरीन शायर के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम के मजबूत सिपाही थे नाजिश प्रतापगढ़ी

लालगंज, प्रतापगढ़। उर्दू शायरी के सम्मान से विभूषित जिले के शायर मरहूम नाजिश प्रतापगढ़ी सिर्फ एक उम्दा शायर ही नही वरन वे स्वतंत्रता संगाम के एक मजबूत सिपाही भी थे। प्रतापगढ़ जनपद के सिटी कस्बे में एक सम्पन्न जमींदार घराने में जन्म लेने वाले नाजिश प्रतापगढ़ी जब मात्र नौ वर्ष के थे तभी उन्होने अंग्रेजो हिन्दुस्तान छोड़ो आन्दोलन में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। उक्त बातें राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एवं सामाजिक संस्था जनहित सेवा संस्थान अमेठी द्वारा आयोजित नाजिश प्रतापगढ़ी की हयातों खिदमत विषय पर आयोजित सेमिनार व मुशायरे के दौरान राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज अमेठी की प्राचार्या डॉ0 फूलकली गुप्ता ने कही। क्षेत्र के नवहा शाहबरी स्थित अखिलेश इण्टर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान लोगो को सम्बोधित करते हुए समाजसेवी बिन्देश्वरी प्रसाद दुबे ने कहा कि शायर नाजिश प्रतापगढ़ी को उनकी विद्वता के लिए उन्हे साहित्य का हिमालय भी कहा जाता है। बनारस से आये समाजसेवी बीएल प्रजापति ने कहा कि 1984 में दिल्ली के लालकिले के मुशायरे में जब प्रतापगढ़ी ने अपना कलाम पेश किया तो तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भी भावुक हो गये थे। कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि पधारे सपा नेता पूर्व ब्लॉक प्रमुख व सदस्य जिला पंचायत अमरेन्द्र सिंह पिन्टू व अध्यक्ष व्यापारमण्डल रणविजय सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये। जनहित सेवा संस्थान द्वारा आयोजित सेमिनार के बाद शुरु हुए मुशायरे में परवाना प्रतापगढ़ी ने पढ़ा कि अश्क ये बह रहे है तुम्हारे लिए रंजोगम सह रहे है तुम्हारें लिए वहीं विद्वान शायर डॉ0 अनीस देहाती ने वर्तमान सामाजिक विसंगति पर कटाक्ष करते हुए पढ़ा कि राम-रमउझा दुआ बन्दगी यस गायब भा पांडे, कामिल अमेठवी ने पढ़ा-जो सर उठायेगा उसको हम कुचल देंगे, वतन पे जान लुटा देंगे। रमेशर सिंह निराश, मकसूद जाफरी, लईक सुल्तानपुरी, शैदा सुल्तानपुरी व समीर मिश्र आदि शायरों ने भी अपनी-अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके पहले संस्थाध्यक्ष संजय पाण्डेय एवं उपाध्यक्ष पवन पाण्डेय तथा कोषाध्यक्ष श्रीनाथ सिंह द्वारा आये हुए अतिथियो व शायरों को शाल व प्रतीक चिन्ह देकर तथा पुष्पगुच्छ प्रदान कर स्वागत किया। मॉ वाणी वन्दना से प्रारम्भ हुए कार्यक्रम में शायरों व वक्ताओं ने उपस्थित जन समूह को भूरपूर जानकारी देने के साथ-साथ उनका मनोरंजन भी किया।