हो रहा अलविदा साल ये

हो रहा अलविदा साल ये

देकर खट्टी मीठी, सुख, सुकून

और दुःख, दर्द, पीड़ा , अनहोनी 

की यादें कई....

रहा जहां पहरा कोरोना का 

उस पर मौत का तांडव, 

लॉकडाउन का कहर, 

बेबसी की मार हर घर, 

हर शहर, हर नगर, हर देश।

वहीं एक के बाद एक कुदरत 

के कहर ने भी ढाए न सितम कम बाढ़, 

चक्रवर्ती तूफान, लैंडस्लाइड 

ने मचाई रखी आफत ज़िन्दगीयों में।

इन सबसे उभरे भी नहीं नित नए वैरिएंट ,नए बुखार, नए वायरस बने रहे चुनौती

अब क्या कोई रखे याद इस में पूरा साल तो बस बिता नित नई  आज़माइशों में

कितने जाने पहचाने

कितने अपने हुए जुदा जिनकी गिनती भी है मुश्किल

अब जब जा ही रहा ये साल

तो बस है विनती इतनी सी

न हो कोई भी साल इतना भयावह, 

तनाव भरा, दर्द में लिपटा

बस हो सुकून, शांति, चैन दिलों , 

घरों , देश, दुनिया में

सच में हो साल नया नए मायनो में ।।

....मीनाक्षी सुकुमारन

        नोएडा