"एक गीतकार जो अब याद बन गया"

कुछ लोग दुनिया से जाने के बाद भी अपनी एक आगवी छाप छोड़ जाते है।

वक्त की नब्ज़ को जानने वाले, नई पीढ़ी की पसंद को पहचानने वाले इस दौर के मशहूर गीतकार 'इब्राहिम अश्क' उनमें से एक है जो अब हमारे बीच नहीं रहे। वह किसी परिचय के मोहताज नहीं, जिनकी शायरियाँ, गाने और गज़ल उनकी शख़्सीयत की पहचान है

उन्होंने बॉलीवुड की कई फिल्मों के लिए शानदार गीत लिखे हैं, जिसमें 'कोई मिल गया', 'क्रिष', 'वेलकम', 'जानशीन', 'ब्लैक ऐंड वाइट', 'आप मुझे अच्छे लगने लगे' जैसी कई सारी फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा, वह शायर भी थे। हालांकि, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक पत्रकार के रूप में की थी।

पर इनके लेखन में एक लय है, इनकी शब्दों की जादूगरी का एक छोटा सा उपहार,

कुछ दूर हमारे साथ चलो हम दिल की कहानी कह देंगे।

समझे न जिसे तुम आँखों से वो बात ज़ुबानी कह देंगे।

जो प्यार करेंगे जानेंगे हर बात हमारी मानेंगे

जो ख़ुद न जले हों उल्फ़त में वो आग को पानी कह देंगे।

जब प्यास जवाँ हो जायेगी एहसास की मंज़िल पायेगी

ख़ामोश रहेंगे और तुम्हें हम अपनी कहानी कह देंगे।

अल्फ़ाजों के सिकंदर इब्राहिम अश्क ने आज शाम चार बजे इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है।

इब्राहिम अश्क एक भारतीय फिल्म जगत के गीतकार थे। जोकि मुख्य तौर से हिंदी सिनेमा में सक्रिय थे। इब्राहिम अश्क अब तक कई बेहतरीन फिल्मों के गीत लिख चुके हैं, जिनमे महाभारत-3डी एनिमेशन, लाइफ में हंगामा है आदि शामिल हैं। इब्राहिम की हालिया रिलीज फिल्म महाभारत-3डी एनिमेशन है।

20 जुलाई 1951 को मध्य प्रदेश के मंदसौर में जन्मे इब्राहीम अश्क पत्रकारिता से जुडे रहे, ‘इन्दौर समाचार’, ‘शमा’, ‘सुषमा’ और ‘सरिता’ के लिए काम किया। इसके बाद वो मुंबई चले गए। उन्होंने ने कई फिल्मों के लिए गीत लिखें। इसके अलावा 700 एलबम के लिए गीत लिखें। उनकी ‘इलहाम आगही’, ‘करबला’, ‘अलाव’, ‘अंदाज़े बयां’, ‘तनक़ीदी शऊर’ नामक किताबें प्रकाशित हुई हैं। उनकी शायरी पर पांच लोगों ने पी-एचडी भी किया है।

उनकी लिखी कुछ कम्माल की पंक्तियाँ ताउम्र ज़हन में बस गई है,

"वो न मिल पाए अगर मुझको इस ज़माने में

तो ऐसी हूर का दुनिया में कोई ख़्वाब न दे"

अनकी हर एक रचना पढ़कर मुँह से वाह ह वाहह निकल जाती है, बहुत बड़ी खोट दे गए। इनके निधन से बोलीवुड जगत में शोक की लहर फैल गई है। इब्राहिम अश्क को शनिवार सुबह खांसी हुई थी और उसके बाद ही उन्हें खून की उल्टियां होने लगी थीं। इसके बाद उन्होंने तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां पर जांच में पता चला कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित थे। वह हार्ट के मरीज भी थे और इसी वजह से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था लेकिन उन्होंने आज अपनी अंतिम सांस ली। इब्राहिम अश्क का कल सुबह अंतिम संस्कार किया जाएगा। साहित्य जगत के आसमान से एक रोशन सितारा बुझ गया। अल्लाह इनको जन्नत बख़्शे। इब्राहीम अश्क उनकी रचनाओं के माध्यम से हमारी यादों में हंमेशा झिलमिलाते रहेंगे।

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगलूरु, कर्नाटक)