आसमान मे सुराग

समय की सीमा लांघकर जो आगे बढ़ जाते है।

पत्थर का सीना चीरकर सपनो का महल बनाते हैं।।


जुनून के दीये में सकंल्प की बाती जलाते है।

तिनका तिनका जोड़कर उम्मीदों के फूल खिलाते है।।


सघंर्ष की लौ से कोना कोना महकाते है।

धीरज धैर्य से पथ को सरल सुगम बनाते है।।


निरन्तर प्रयास से सफलता की सीढ़ी बनाते हैं।

पग पग धरकर आसमान में सुराग करते है।।


ऐसे रणवीर के आगे हार भी नतमस्तक हो जाता है।

समय स्वयं उसके वजूद को अपने बाहों से तराशता है।।


सफलता पाकर गदगद हो जाते है।

विनम्र भाव से जग को रोशन कर जाते है।।


प्रियंका त्रिपाठी 'पांडेय'

प्रयागराज उत्तर प्रदेश