ये जीवन इक शतरंज है

कुदरत ने कैसी बिसात बिछाई है,

आगे बढ़ने की धुन मन में छाई है।

जिसने जिसको मार्ग दिखाया है,

उस मोहरे ने ही चोट पहुँचाई है।।


हर कोई यहां मारता दंश है।

यह जीवन एक शतरंज है।।


प्रेम दया का भाव जिसने दिखाया है,

अगली चाल ने उसको सबक सिखाया है।

रिश्तो का यहाँ कोई स्थान नहीं है,

स्वयं के बारे में सोचना ही सही है।।


रिश्तों का केवल यहां अंश है।

यह जीवन एक शतरंज है।।


हर प्यादे की मात तुम्हें देना है,

न किसी का हाथी न घोड़ा है।

बुद्धि विवेक से जिसने काम लिया है,

वही इस जीवन को हक से जिया है।।


उसका ही आगे बढ़ा वंश है।

यह जीवन एक शतरंज है।।


गीता देवी

औरैया उत्तर प्रदेश