स्वास्थ्य के असली मायने

पहला सुख निरोगी काया

 दूजा सुख घर में माया

तीजा सुख सुपात्र नारी

चौथा सुख पुत्र आज्ञाकारी

जी हां बिल्कुल सही कहा गया है कि जीवन के सभी सुखों में सबसे पहला सुख या यूं कहें कि जीवन की सबसे महत्वपूर्ण जो चीज हमारे जीवन में मायने रखती है वह है हमारा स्वास्थ्य,क्योंकि यदि हमारा स्वास्थ्य अच्छा है तो जीवन के बाकी सुख हमें स्वत: प्राप्त हो जाते हैं। यह भी उतना ही सच है कि जीवन के बाकी सुखों का आनंद हम तभी उठा सकते हैं जब हम स्वस्थ होते हैं। स्वस्थ ना होने की स्थिति में बाकी सुखों का हमारे जीवन में मूल्य शून्य हो जाता है।

आपने यह तो सुना ही होगा कि बीमार होने की अवस्था में धन, दौलत ,संतान, जीवनसाथी, बंगला, गाड़ी, गहने ,संपत्ति कुछ महत्व नहीं रखता, उस स्थिति में बीमार व्यक्ति को सिर्फ और सिर्फ अपने स्वास्थ्य की ही चिंता होती है ।वह किसी भी तरीके से किसी भी कीमत पर अपने स्वास्थ्य को वापस पा लेना चाहता है।यदि किसी बीमार व्यक्ति से पूछा जाए कि उसे उसके स्वास्थ्य और कार में से यदि एक चीज को चुनना हो तो वह क्या चुनेगा तो निसंदेह उसका जवाब यही होगा कि सर्वप्रथम उसे उसका स्वास्थ्य ही चाहिए क्योंकि बिना स्वस्थ हुए वह कार में बैठने का सुख प्राप्त कर ही नहीं सकता। 

कहने का तात्पर्य यह है कि स्वास्थ्य हम सभी के जीवन में प्राथमिकता रखता है और बिना स्वस्थ हुए हम एक सुखी जीवन की कल्पना कर ही नहीं सकते। स्वास्थ्य की कीमत उस व्यक्ति से पूछिए जिसका स्वास्थ्य ह्रास हुआ है अर्थात जो लोग लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं या फिर उन लोगों से जिनकी बीमारी लाइलाज है।

यह तो हुई स्वास्थ्य के महत्व की बात,अब प्रश्न यह उठता है कि स्वास्थ्य का वास्तविक अर्थ आखिर होता क्या है ? स्वास्थ्य का अर्थ अलग-अलग व्यक्तियों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है ,परंतु स्वास्थ्य का मूल अर्थ सभी व्यक्तियों के लिए समान अर्थात एक जैसा ही होता है। सार रूप में कहा जा सकता है कि स्वास्थ्य वह स्थिति होती है जिसमें व्यक्ति मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक, संवेगात्मक और भावनात्मक रूप से स्वयं को मजबूत एवं अच्छा महसूस करता है, स्वस्थ महसूस करता है। उसे किसी भी प्रकार का अवसाद अर्थात तनाव महसूस नहीं होता है और जीवन की छोटी बड़ी चुनौतियों को वह अपने प्रयासों से पार कर लेता है।उसमें भरपूर आत्मविश्वास होता है और सोचने समझने ,तर्क वितर्क करने ,सही गलत का फैसला करने की शक्ति भी होती है। किस समय क्या काम किस तरीके से करना है,एक स्वस्थ व्यक्ति को यह बताने की जरूरत नहीं होती है। वह अपने निर्णय अपने आप ले सकता है और आवश्यकता पड़ने पर दूसरों का भी उचित मार्गदर्शन कर सकता है।विभिन्न मानवीय गुणों को अपने में समेटे हुए वह एक अच्छे नागरिक होने का फर्ज निभा सकता है और देश तथा समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर सकता है।

स्वास्थ्य के अर्थ और महत्व को जानने के पश्चात अब बारी आती है यह जानने की कि एक सुखी और स्वस्थ जीवन जीने के क्या मूल मंत्र होते हैं अर्थात स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए हमें क्या क्या करना चाहिए और किन-किन चीजों से स्वयं को दूर रखना चाहिए,क्या चीज कितनी मात्रा में खानी चाहिए और किस चीज का परहेज करना चाहिए, खानपान में कोई चीज़ क्यों शामिल करनी चाहिए और किन अच्छी आदतों को अपनाकर हम स्वयं को सेहतमंद रखकर बेहतर जीवन जी सकते हैं।

इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर हम अपने आपको स्वास्थ्य रूपी तोहफ़ा दे सकते हैं और एक खुशहाल जीवन जी सकते हैं।तो आइए ,जानते हैं उन बातों के बारे में जो बेहतर जीवन जीने के लिए हमारी सहायता करती हैं:

(1) खुद को स्वस्थ रखने के लिए हमें खुद से प्यार करना होगा,खुद की देखभाल करनी होगी और अपनों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के साथ-साथ हमें अपने स्वास्थ्य का भी उतना ही ध्यान रखना होगा स्वयं की उपेक्षा करना बंद करना होगा, जितनी चिंता हम अपने परिवार के सदस्यों की करते हैं उतनी ही चिंता हमें अपने स्वास्थ्य की भी करनी होगी और दूसरों के स्वास्थ्य हित के लिए जो कार्य हम करते हैं उन कार्यों को हमें अपने लिए भी  करना होगा क्योंकि अगर हम स्वस्थ होंगे तभी हम अपनों के स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रख पाएंगे।हमारे अस्वस्थ होने की स्थिति में हम ना ही अपना और ना ही अपनों का ध्यान रख पाएंगे।

(2) हमें अपने नाश्ते दोपहर के भोजन और डिनर करने का समय निश्चित करना होगा और नियत समय पर ही भोजन करने की आदत डालनी होगी।

(3) अपने भोजन में हमें उन सभी चीजों को संतुलित मात्रा में शामिल करना होगा जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बनी है जैसे दूध फल सलाद और स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थ।

(3) यहां मैं यह नहीं कहूंगी कि जंक फूड को अपने भोजन में शामिल ना करें क्योंकि यह  हमारे लिए संभव ही नहीं है । हमारी दिनचर्या और खानपान की आदतों को ध्यान में रखते हुए मैं इतना कह सकती हूं कि शायद ही कोई व्यक्ति जंक फ़ूड को पूरी तरह से अवॉयड करता हो इसलिए जंक फ़ूड खाएं, परंतु नियंत्रित मात्रा में खाएं। महीने में दिन निश्चित कर लें कि किन किन दिनों में जंक फूड खाया जाएगा। लगातार कई दिनों तक जंक फूड ना खाएं क्योंकि जंक फूड खाने से हमारे पाचन शक्ति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

(4) सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी स्थिति में अपना नाश्ता लंच या डिनर स्किप ना करें ।यदि कभी भूख कम है तो थोड़ा खाएं परंतु ऐसा ना हो कि बिल्कुल ही ना खाएं ।जो खाने का मन है वह खाएं, परंतु हेल्दी खाएं।

(5) मिल बांट कर,साथ में खाना खाने से भी हमारे स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है क्योंकि उस स्थिति में हम जो भी खाते हैं वह हम पूर्ण संतोष के साथ खाते हैं ।इसलिए मिलजुल कर अपने मित्रों और परिवारजनों के साथ बैठ कर खाना खाने की आदत को स्वयं में विकसित करें।

(6) प्रातः कालीन और सांयकालीन सैर को प्राथमिकता दें। एक्सरसाइज, प्राणायाम, व्यायाम और योगा प्रतिदिन नियमित रूप से करें।

(7) जितना संभव हो सके अपने आप को नकारात्मक लोगों एवं विचारों से दूर रखें और सकारात्मक लोगों के संपर्क में रहें, क्योंकि सकारात्मकता से जीवन जीने का दृष्टिकोण ही बदल जाता है और जीना बेहतर और आसान हो जाता है।

(8) यदि किसी वजह से आपकी कोई दवाइयां चल रही हैं तो अपनी दवाइयां समय पर लें और किसी भी कीमत पर उन्हें अनदेखा ना करें ।साथ ही अपने डॉक्टर की सलाह के साथ नियमित रूप से उनका सेवन करें।

(9) वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर बल देते हुए अपने मन में किसी के प्रति ईर्ष्या भाव न पालें ,सभी से प्रेम करें और जीवन को ईमानदारी से भरपूर जिएं।

(10) अपने पूरे दिन में कुछ मिनट अपने शौक को पूरा करने के लिए अवश्य निकालें आपका शौक चाहे लिखना, पढ़ना, घूमना, कुकिंग करना,बुनाई,सिलाई,कढ़ाई करना,चैटिंग करना या अन्य कुछ भी हो को समय अवश्य दें।

उपरोक्त सभी बातों के साथ-साथ व्यक्तिगत साफ़ सफाई और स्वच्छता का ध्यान रख हर 6 महीने में अपने शरीर की पूरी जांच अवश्य कराएं एवं अपने स्वास्थ्य को हर हाल में प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य के साथ कभी भी किसी भी प्रकार की असावधानी न बरतें। यदि हम सभी उपरोक्त सभी बातों को अपने जीवन में अपनाएंगे तो मुझे पूरा विश्वास है कि हम स्वयं को स्वास्थ्य के रूप में एक अनमोल उपहार दे पाएंगे।

पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग दिल्ली