अपोलोमेडिक्स अस्पताल ने सफलतापूर्वक लिविंग डोनर विधि से ट्रांसप्लांट कर बचाई मरीज की जान

लखनऊ। अपनी स्थापना के बाद से अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ निरंतर नई और अल्ट्रा मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी से मरीजों को नया जीवनदान दे रहा है। इसी कड़ी में अपोलोमेडिक्स अब एनसीआर के बाद लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करने वाला यूपी का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल बन चुका है। अस्पताल में एक 37 वर्षीय लिवर के मरीज की लिविंग डोनर ट्रांसप्लांट के जरिये जान बचाई गई, इस व्यक्ति को लिवर डोनेट उसकी पत्नी ने किया था। अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लीवर ट्रांसप्लांट एंड एचपीबी सर्जरीज के कंसलटेंट डॉ आशीष मिश्रा ने बताया कि 37 वर्षीय युवक का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। वे बेहद गंभीर हालत में अपोलोमेडिक्स आए थे। उन्हें लंबे समय से लिवर की बीमारी थी और पेट में पानी भरा था। इलाज में उनका लंबा खर्चा हो चुका था और वे इलाज के लिए कई अस्पताल जा चुके थे। साथ में उन्हें डायबिटीज भी थी। इस दौरान वे अनेकों बार आइसीयू में भी भर्ती रहे और मौत के मुंह से बाहर आए थे। वे लिवर खराब होने की वजह से कुछ खा-पी नहीं पा रहे थे जिस कारणवश उनका शरीर बेहद कमजोर हो गया था। अपोलो हॉस्पिटल में उन्हें लिवर ट्रांसप्लांट का सुझाव दिया जिससे वे लंबा जीवन जी सकते थे। मरीज का लिविंग डोनर से ट्रांसप्लांट किया गया। लिवर का लोब उनकी पत्नी जिनकी उम्र 32 वर्ष थी उनसे लिया गया। उनके लिवर का 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा लिया गया। रेसीपियंट का ट्रांसप्लांट लगभंग 16 से 17 घंटे तक चला, वहीं डोनर की सर्जरी लगभग 7 से 8 घंटे तक चली। डोनर और रेसीपियंट दोनों स्वस्थ्य है और शीर्घ ही डिस्चार्ज होंगे। लगातार कई सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट करने वाला अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल इलाके का पहला प्राइवेट हॉस्पिटल बन गया है। कंसलटेंट सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड लिवर ट्रांसप्लांट डॉ वलीउल्लाह ने कहा, “लिवर ट्रांसप्लांट को लेकर समाज में बहुत सारे मिथक हैं, जिससे लोग डर जाते हैं। लिवर ट्रांसप्लांट पूरी तरह से सुरक्षित और जीवन रक्षक प्रक्रिया है। यह दो तरीकों से किया जाता है, एक है कैडेवर लिवर ट्रांसप्लांट, जिसमें मरीज को मृत व्यक्ति का लिवर दिया जाता है। दूसरा है लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट, जिसमें उसके परिवार के किसी जीवित व्यक्ति के लीवर का लगभग दो-तिहाई हिस्सा मरीज में ट्रांसप्लांट किया जाता है। डोनर का लिवर केवल 3-6 सप्ताह में अपने मूल आकार में वापस आ जाता है। इसका दाता के शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। निदेशक एवं चिकित्सा सेवा और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार ने कहा, ष्लिवर प्रत्यारोपण एक बहुत ही जटिल सर्जरी है जिसमें न केवल कुशल डॉक्टरों की टीम की आवश्यकता होती है, बल्कि शल्य चिकित्सा के बाद उत्कृष्ट देखभाल और क्रिटिकल केयर बैकअप की भी आवश्यकता होती है। अपोलोमेडिक्स में हमारे पास ट्रांसप्लांट रोगी की चौबीसों घंटे देखभाल के लिए 24Û7 क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों के साथ समर्पित ट्रांसप्लांट आईसीयू है जो यह सुनिश्चित करता है कि संक्रमण मुक्त और सुरक्षित वातावरण हो क्योंकि ट्रांसप्लांट के मरीज संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं।”अस्पताल में कई लिविंग लिवर डोनर ट्रांसप्लांट की सफलता से उत्साहित, अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के सीईओ और एमडी, डॉ मयंक सोमानी ने कहा, “हमें बेहद गर्व है कि हमारी टीम लिवर जैसी जटिल बीमारियों से पीड़ित रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज कर रही है। न केवल लखनऊ बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी प्रत्यारोपण कर रहा है और अपोलोमेडिक्स अस्पताल मरीजों को एक छत के नीचे अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से लैस अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रहा है व सख्त कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर रहा है। मैं डॉ. आशीष कुमार मिश्रा, डॉ वलीउल्लाह सिद्दीकी, डॉ राजीव रंजन और डॉ सुहांग वर्मा सहित लीवर ट्रांसप्लांट की पूरी टीम को लगातार तीसरे सफल जीवित डोनर लिवर ट्रांसप्लांट के लिए बधाई देता हूं और आशा करता हूं कि हमारी टीम लोगों की उम्मीदों पर खरी उतरती रहेगी। मैं सभी से स्वस्थ खाने और बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए सक्रिय जीवनशैली अपनाने की अपील करता हूं।