"चूक या षड्यंत्र"

जिस देश के लोगों में प्रधानमंत्री का सम्मान करने जितनी तहज़ीब नहीं वो देश कभी उपर नहीं उठ पाएगा। किसी राज्य का सीएम चाहे किसी भी पार्टी का क्यूँ न हो, जब उनके राज्य में प्रधानमंत्री का दौरा होने वाला हो तब सीएम की पूरी ज़िम्मेदारी बनती है की प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा इंतज़ाम हो। पर पंजाब के सीएम चरण सिंह उर्फ़ चन्नी जी इस मामले में कमज़ोर साबित हुए। ऐसी ही चूक की वजह से देश ने इंदिरा गांधी और राजीव गाँधी को खो दिया है, यहाँ भी कुछ भी हो सकता था। इस मामले को हल्के में लेना मूर्खता होगी, संगीन मामला है। 

जब पता था प्रधानमंत्री आ रहे है तब इतने सारे विरोधियों को छूट कैसे मिल गई, ये किसान आख़िर चाहते क्या है सारी मांगे पूरी होने के बावजूद प्रधानमंत्री का विरोध क्यूँ? प्रधानमंत्री को ये बयान देना पड़े कि चन्नी जी को बता दीजिएगा की 'मैं ज़िंदा वापस लौट आया हूँ' ये उस राज्य के सीएम के लिए शर्मसार करने वाला बयान है।

फरीदकोट के कोटकपूरा में पीएम मोदी की फिरोजपुर की रैली में जा रहे भाजपा वर्करों की बसों को किसानों ने रोक लिया है। दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हो गई तब पुलिस क्या कर रही थी? किसान क्या अपनी सोच से प्रधानमंत्री के विरोध में उतर रहे है, या कोई उनको मोहरा बनाकर खेल रहा है? 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब के फिरोज़पुर में रैली करने वाले थे, लेकिन रैली स्थल पर जाते वक्त सड़क पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोक दिया, जिसके चलते उन्हें करीब 20 मिनट तक इंतज़ार करना पड़ा। कुछ देर इंतज़ार करने के बाद पीएम मोदी के काफिले को वापस लौटना पड़ा। इस घटना के बाद कई सवाल खड़े होते है। 

आज पंजाब में इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुख्यमंत्री चन्नी को भी इस प्रोग्राम में शामिल होना था पर कल रात अचानक से प्रोग्राम केंसिल कर लिया। केजरीवाल, सूरजेवाला, प्रियंका, दीपेंदर सब अचानक से एकसाथ कोविड पॉजिटिव हो कर अपने अपने घरों में बंद हैं। राहुल विदेश में गुप्त यात्रा पर हैं। जब कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चन्नी को आना था फिर अचानक चन्नी ने अपना प्रोग्राम कैंसिल क्यों कर दिया? बहुत सारी चीज़ें इशारा कर रही है की जो हुआ वो महज़ अकस्मात नहीं। जब प्रधानमंत्री किसी राज्य के दौरे पर होते तब नियमानुसार राज्य सचिव और डीजीपी को उनके साथ रहना जरूरी है पर यहाँ सिर्फ़ दोनों की गाड़ियां थी पर गाड़ी में राज्य सचिव और डीजीपी नहीं थे। तो ये दोनों ज़िम्मेदार व्यक्तित कहाँ गायब थे।

जब मौसम खराब हुआ प्रधानमंत्री का हेलीकॉप्टर उड़ नहीं सका तब प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से निकले प्रधानमंत्री के सड़क मार्ग से निकलने की जानकारी सिर्फ पंजाब पुलिस के अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय को ही दी जाती है, प्रधानमंत्री का सारा प्रोग्राम और रूट गुप्त रखा जाता है, फिर अचानक इतनी भारी संख्या में बसों से सड़क जाम बहुत कुछ कह जाता है। 

आप मोदी नाम से नफ़रत कर सकते है, पर देश के प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान होना आपके संस्कारों का आईना होता है। क्या कांग्रेस ने हार के डर की वजह से  जान बुझकर ये षड्यंत्र रचा था, या सी एम सच में इन सारी गतिविधियों से अन्जान थे? सत्ता की लालसा ने इंसान को कितना गिरा दिया है।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में ये सबसे बड़ी चूक मानी जानी चाहिए। गृह मंत्रालय के अनुसार, हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से लगभग 30 किलोमीटर दूर, जब पीएम का काफिला एक फ्लाईओवर पर पहुंचा, तो वहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क को अवरुद्ध कर दिया था। पीएम 15-20 मिनट फ्लाईओवर पर फंसे रहे। पीएम की सुरक्षा में यह बड़ी चूक है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और यात्रा की योजना के बारे में पंजाब सरकार को पहले ही बता दिया गया था। प्रक्रिया के अनुसार उन्हें रसद, सुरक्षा के साथ-साथ आकस्मिक योजना तैयार रखने के लिए जरूरी व्यवस्था करनी थी। माना कि प्रधानमंत्री पहले हेलिकोप्टर से आने वाले थे पर खराब मौसम के कारण सड़क से आना पड़ा पर प्रसाशन और पुलिस को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए, आख़िर देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा का सवाल है। प्रधानमंत्री को यूँ लौटना पड़े ये पंजाब के सत्ताधिशों की सबसे बड़ी नाकामी है, ऐसे प्रसाशन के ख़िलाफ़ कड़ी कारवाई होनी चाहिए।

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगलूरु,कर्नाटक)