उफ्फ ये सर्दी

किसी के लिए खूबसूरत मौसम 

रजाई , गर्म हीटर, मनभावन व्यजंन 

सरसों का साग, मक्की की रोटी, 

गाजर का हलवा, लज़ीज़ गोभी के 

पनीर के पकौड़े, सूप,  मूँगगफली, 

रेवड़ी, गजक और न जाने क्या क्या ......।।

उफ्फ ये सर्दी

बनकर कहर आ जाती है बुजुर्गों पे 

बुखार, खांसी, जोड़ो का दर्द, 

कपकपाती कमज़ोर हड्डियां

रोजमर्रा की दिनचर्या भी हुई मुश्किल बड़ी।

उफ्फ ये सर्दी

बन आफत बरसे 

उन पर जिन का न आसरा 

कोई न रैन बसेरा कोई

कोहरे में लिपटी  ठंडी सुबहें

ओस की बूंदों से गीली रातें

दिन का सूरज भी निकलता

न के बराबर

न तन पर ढांपने का गर्म कपड़े

न ओढ़ने को कंबल या रजाई

मुट्ठी पर चलती लकड़ियों के 

सहारे बस मिलता है ताप

यूँ बेबसी और न जाने कितनी 

तकलीफ़ों में होती यूँ गुजर बसर।

उफ्फ ये सर्दी

किसी के लिये मौज

तो किसी के लिये सज़ा

किसी के लिये वरदान

तो किसी के लिये अभिशाप

किसी के लिये मेहर

तो किसी के लिए कहर।।

.......मीनाक्षी सुकुमारन

            नोएडा