हिंदी माँ तुझे प्रणाम

 जब तक हिंदी पर बिंदी लगती नहीं, हिंदी माँ आप सजती नहीं l 

 कितनी भी अंग्रेजी बोलें भारतीय, आपके बिना नहीं है जीवन l 

  आपने कथा कहानी, उपन्यास, दोहा  चौपाई अलंकार दिए हैँ l 

 आपके बिना पूजा पाठ भी, अधूरे ही रह जाते हैँ l 

 पर दुख यह मुद्दा शब्द, किसने बनाकर छोड़ दिया है l

  अनेक मुद्दे हैँ पर नकाब है, जो मुद्दे नहीं बेनकाब हैँ l

  क्यों बना दिया राजनीति शब्द, अब तो यह खेल हो गया है l 

  हिंदी माँ हमें आपसे प्यार है, भाषाएँ अनेक पर आप श्रृंगार हैँ ।

 मज़बूरी कुछ ऐसी हो गयी है, कुछ शब्द आपके कुटुम्बी हो गए हैँ l 

 ट्रेन स्टेशन स्कूल यूनिफार्म, ये तो आदत हो गए हैँ l

 हिंदुस्तानी हैँ तो आपको पूजना, हमारा   परम कर्तव्य है l         

   आपसे कुछ छिपा सकते नहीं, हमने ही अंग्रेजी को तूल दिया है l  

 शासन प्रशासन व्यापार को, सहायक भाषा की जरुरत पड़ जाती है l 

 अंग्रेज चले गए भारत छोड़कर, फिर भी हम चाय पीते हैँ l

 हिंदी माँ कुछ कर दो ऐसा, सब धर्मों की जय हो l 

सब भाषाओ का महत्त्व हो, हिंदी -बस हिंदी हो जाये ।

 पूनम  पाठक बदायूँ