चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर तमाम पार्टियों लगा रखा है एड़ी-चोटी का जोर

चंडीगढ़ : चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर अब तमाम पार्टियों की इज्जत दांव पर लगी है। माना यह जा रहा है कि इस चुनाव में जिस पार्टी का मेयर जीतेगा, उसे पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में फायदा होने का अनुमान है। यही वजह है आम आदमी पार्टी से लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आलाकमान तक ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है कि उनकी पार्टी के पार्षद टूटे नहीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस पार्टी के विधायक टूटेंगे उस पार्टी के लिए जनता के बीच विश्वास बना पाना न सिर्फ मुश्किल होगा बल्कि चुनावों में मुसीबत भी खड़ी करेगा। फिलहाल चंडीगढ़ में शनिवार को नगर निगम के मेयर का चुनाव है और इस चुनाव पर भारतीय जनता पार्टी से लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का पूरा आलाकमान नजर लगाए हुए है।

पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर शनिवार का दिन देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के मुख्यालयों में बड़ी हलचल वाला दिन होगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चंडीगढ़ के नगर निगम में मेयर बनने के लिए किसी भी पार्टी के पास इतना बहुमत नहीं है, जितने पर मेयर बनता है। ऐसे में जिस पार्टी का मेयर बनेगा निश्चित तौर पर उसे किसी दूसरी पार्टी का खुलकर या गुपचुप तरीके से समर्थन मिला ही होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के पूर्व प्रवक्ता और पंजाब पर "अ राइज ऑफ पंजाब पॉलिटिक्स" किताब लिखने वाले गुरमीत सिंह कहते हैं कि वैसे तो चंडीगढ़ के अपने छोटे-छोटे मुद्दे रहते हैं, जिन पर स्थानीय नगर निगम के चुनाव होते हैं। लेकिन इस बार पंजाब के विधानसभा चुनावों से पहले चंडीगढ़ नगर निगम के चुनावों में पहली दफा बड़ा उलटफेर हुआ है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को पीछे छोड़ते हुए पहली बार आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

पंजाब में भी आप विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। इसलिए नगर निगम के होने वाले मेयर के चुनाव में जिस पार्टी का भी मेयर बनेगा उसका सीधा सीधा असर पंजाब के विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। वजह बताते हुए गुरमीत सिंह कहते हैं कि एक बात तो स्पष्ट है जिस पार्टी का मेयर बनेगा वह निश्चित तौर पर किसी दूसरी पार्टी के पार्षदों को तोड़ेगा। उनका कहना है कि जिस पार्टी के पार्षद टूटेंगे उस पार्टी के बारे में पंजाब के चुनाव में जमकर प्रचारित भी किया जाएगा। ताकि लोगों में इस बात का संदेश जाए कि मेयर बनाने वाली पार्टी में लोगों का भरोसा है। और अगर यह पता चल जाता है कि किस पार्टी के पार्षद टूटे हैं, तो उसके बारे में पंजाब विधानसभा के चुनावों के दौरान जबरदस्त नकारात्मक प्रचार होगा। जाहिर है ऐसे प्रचार से पंजाब के चुनाव में निश्चित तौर पर चंडीगढ़ के बनने वाले मेयर की चुनावी प्रक्रिया असर डालेगी।

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व में शामिल एक वरिष्ठ भाजपा नेता भी मानते हैं कि विधानसभा चुनाव तो पंजाब में है, लेकिन संदेश चंडीगढ़ से ही जाएगा। उनका कहना है कि उनकी पार्टी के पास स्थानीय सांसद का एक वोट मिलाकर 14 वोट हैं। इतने ही आम आदमी पार्टी के पास भी हैं। उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा वाले कुछ पार्षद गलती से दूसरी पार्टी में चले गए और चुनाव भी जीत गए। उक्त नेता का कहना है अब अगर ऐसे कोई भी पार्षद उनकी पार्टी में आस्था जताते हुए समर्थन करते हैं, तो उन सभी का न सिर्फ स्वागत है बल्कि उनका पार्टी में सम्मान भी है। चंडीगढ़ के चुनाव में सबसे कमजोर स्थिति कांग्रेस की है, जबकि पंजाब में इस वक्त कांग्रेस की सरकार है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कांग्रेस के पार्षद टूट कर भाजपा या आम आदमी पार्टी में शामिल होते हैं, तो इसका भी संदेश बहुत बेहतर नहीं जाएगा। कमोबेश यही स्थिति हर पार्टी की होने वाली है।

दरअसल अभी तक चंडीगढ़ के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला रहता था। कहने को तो अकाली दल भी चंडीगढ़ के नगर निगम चुनाव में अपनी किस्मत आजमाते थे, लेकिन तब भारतीय जनता पार्टी के साथ उनका गठबंधन हुआ करता था। लेकिन 2021 के नगर निगम चुनावों में पहली बार आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आई है। चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है। मेयर के चुनाव से पहले कोई राजनैतिक सेंधमारी न हो इसलिए पार्षदों को अलग-अलग राज्यों में ले जाया गया है। आम आदमी पार्टी के पार्षद दिल्ली और कांग्रेस के पार्षद को अपने सत्ता वाले राज्य राजस्थान ले जाया गया है। राजनीतिक विश्लेषक गुरमीत सिंह कहते हैं कि इस बार चंडीगढ़ का मेयर चुनाव पंजाब विधानसभा के होने वाले चुनावों पर सीधा सीधा असर डालने वाला है।