'कट्टरवाद छोड़ कर विकास की ओर आगे बढ़िए'

मज़हब नहीं सीखाता आपस में बैर रखना ये उक्ति कितनी सही है? सवाल इसलिए खड़ा होता है की आए दिन हर छोटी बात को धर्म से जोड़ कर देश की अखंडता को तोड़ने की कोशिश की जाती है। अब तो कट्टरवाद की हद हो गई है। लगता है अल्पसंख्यकों को हर बात में मज़हब को घसिटने की आदत हो गई है। भैया सूर्य नमस्कार से परहेज है तो सूर्य की रोशनी से भी पर्दा कर लो, दिन भर जब तक सूर्य दिखाई दे तब तक घरों में रहो, क्यूँ चाहिए रोशनी आपको। ऐसी मानसिकता से अपने बच्चों के दिमाग में भी ज़हर घोल रहे हो। सूर्य नमस्कार योग का हिस्सा है न कि धर्म का। सूर्य उर्जा और प्रकाश का प्रतिक हैं, धर्मांधता के साथ घोलकर क्यूँ पी रहे हो। योग विद्या का अभ्यास कीजिए और जानिए सूर्य नमस्कार के फायदे आप खुद भी करने लगेंगे।

भारत सरकार की ओर से सभी राज्यों को एक जनवरी से सात जनवरी तक अपने स्कूलों में सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन करने का निर्देश दिया गया है। मौलाना ने कहा कि भारतीय संविधान में सभी धर्मों के लोगों को अपने अपने धर्म के अनुसार पूजा-प्रार्थना आदि करने की छूट दी गई है। इसलिए किसी भी धर्म विशेष की पूजा पद्धति को सभी धर्मों के लोगों पर थोपा नहीं जा सकता है। उनका कहना है कि इस्लाम व अन्य धर्मों में सूर्य को देवता मानकर उसकी पूजा करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान करते हुए इस तरह के आदेश को वापस ले। अगर सरकार वाकई देश से मोहब्बत का इजहार करना चाहती है तो उसे देश की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। तो भैया भारतीय बच्चों का स्वास्थ्य अगर सूर्य नमस्कार करने से सुगठित होता है तो ये वास्तविक मुद्दा ही हुआ ना। इसमें सरकार ने कौनसा आपके धर्म पर प्रहार किया। 

धर्म से परे रखकर सूर्य नमस्कार के फ़ायदे देखें, सूर्य नमस्कार हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में बेहद फायदेमंद है। सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटामिन डी हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ गंभीर बीमारियों को भी दूर करने में मदद करता है। 

प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें तो पाचन तंत्र मजबूत हो सकता है। इससे पेट संबंधित समस्या दूर हो सकती है। सूर्य नमस्कार करते समय हम लंबी सांस लेते है, जिसकी वजह से शरीर में होने वाली बेचैनी और तनाव बहुत हद तक दूर होती है। यदि प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करें तो तनाव बहुत हद तक दूर कर सकता है।

कोरोनावायरस में विटामिन डी का पूरी मात्रा में होना बेहद जरूरी माना जा रहा है। यदि सूर्य नमस्कार प्रतिदिन करें, तो शरीर को विटामिन डी प्रचुर मात्रा में मिल सकता है और कोरोनावायरस जैसी खतरनाक बीमारियों से बहुत हद तक बच सकते है।

पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रह़मानी ने कहा कि यह निश्चित रुप से एक असंवैधानिक कृत्य है और देश प्रेम का झूठा प्रचार है। सूर्य़ नमस्कार एक पूजा का रुप है। इस्लाम और देश के अन्य अल्पसंख्यक न तो सूर्य को देवता मानते हैं और न उसकी उपासना को सही मानते हैं। इस लिए सरकार का यह कर्तव्य है कि वह ऐसे निर्देशों को वापस ले और देश के धर्म निर्पेक्ष मूल्यों का सम्मान करे। अनपढ़ और गंवारों जैसी सोच है, इस्लाम क्या प्रकृति से परे है सूर्य नमस्कार करने से कौनसा धर्म का अपमान हो जाएगा। अपने बच्चों के दिमाग को तो कम से कम बख़्श दीजिए।

पूरे मुस्लिम समाज को एकजुट होकर ऐसी अंधेरी गर्ता में ले जाने वाले और अलगाववादी भाव वाले विचारों का विरोध करना चाहिए और ऐसे नेतृत्व को बदलना चाहिए। धर्म-अधर्म, जात-पात की क्षितिज से बच्चों को दूर रखिए और विकास की ओर आगे बढ़िए।

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगलूरु, कर्नाटक)