जिम्मेदार अधिकारियों के चलते गौशाला की हालत बद से बदतर

नवाबगंज (गोंडा) : प्रदेश सरकार नें सड़क पर छुट्टा घूम रहे गौवशों के संरक्षण के लिए क्षेत्र के शाहपुर गांव में गौशाला का निर्माण कराया है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी की उदासीनता से गौशाला की हालत बद से बद्तर हो गई है। गौशाला में क्षेत्र में छुट्टा घूम रहे गौवशों को रखा गया है। लेकिन न तो इनके रहने खाने की उचित व्यवस्था है और न ही इनके देख भाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी की व्यवस्था है। आलम यह है कि इस गौशाला में तिल तिल कर गौवंश मरने के कगार पर हैं। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो ५० से अधिक गौवंश अपनी जान गवां चुके हैं। अगर यही गौवंश खुले में सड़क पर घूम रहे होते तो अपने जीने रहने खाने-पीने की व्यवस्था खुद कर लेते। लेकिन इस गौशाला की चौहद्दी में कैद होने के कारण तिल तिल कर अपनीं जान देने पर मजबूर हैं। गौशाला में कुछ गौवंश की हालत इतनी दयनीय है कि वे अपना हाथ पांव तक नहीं हिला पा रहे हैं। ऐसे में चील कौवे तथा कुत्ते भी मौका मिलते ही उन्हें नोच रहे हैं। इस गौशाला में गौवंश गंदा ठंडा पानी पीने के लिए मजबूर हैं।ठंड से बचाव की भी कोई व्यवस्था नहीं है।न ही उनके खाने के लिए उचित चारे की व्यवस्था हो पाती है।भूसा समाप्त होने के दो से चार दिन बाद भूसे की व्यवस्था हो पाती है। गौशाला में  ८० से ऊपर गौवंश हैं। जिनकी देखभाल के लिए एक ही परिवार के पति पत्नी को रखा गया है। जबकि ८० से ऊपर जानवर की देखभाल के लिए कम से कम पांच कर्मचारियों की आवश्यकता है। गौशाला में चौकीदार रामचंदर पाठक नें बताया कि बीते ६ जनवरी को २८ कुंतल भूसा खरीद गया था जोकि अब समाप्त हो गया है।इस संबंध में खंड विकास अधिकारी राघवेन्द्र प्रताप सिंह नें बताया कि भूसा मंगवाया कर गिरवा दिया गया है।ठ़ड से बचाव के लिए अलाव कि व्यवस्था कराई गई है। जिला प्रशासन को इस गौशाला में उनके देखभाल के लिए उचित कर्मचारियों के तैनाती करनी चाहिए। तथा उनके खाने पीने की उचित व्यवस्था कर इनके जीवन की रक्षा करे।