मकर संक्रांति का पर्व महान

सूर्य जब धनु राशि से मकर राशि में आते है

दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश कर जाते हैं

मनुष्य में सकारात्मक ऊर्जा का होता है संचार

नकारात्मकता को दूर भगाते हैं


भारतवर्ष में जनवरी में यह पर्व मनाया जाता है

कहीं लोहड़ी तो कहीं पोंगल बन कर आता है

सूर्य देव की करते हैं सभी पूजा

खिचड़ी व तिल और गुड़ का दान किया जाता है


बच्चे घर घर जाकर लोहड़ी के गीत गाते हैं

सती,दुल्ला और भट्टी याद किये जाते है

घर के आंगन में अंगीठा जलाया जाता है

जिसमें मूंगफली,रेवड़ियां,तिल गुड़ चढ़ाए जाते हैं


विष्णु भगवान के अंगूठे से निकली थी गंगा

भगीरथ के पीछे चलकर सागर में मिली थी

यशोदा ने श्रीकृष्ण के लिए किया था उपवास

महाराज सागर के पुत्रों को मुक्ति मिली थी


मान्यता है जो मकर संक्रांति को करते हैं 

सूर्य पूजन, खिचड़ी, तिल और गुड का दान

प्रसन्न हो जाते हैं सूर्य देव उनसे

देते हैं उनको मनचाहा वरदान


मकर संक्रांति को सूर्योदय से पहले उठकर

जो करते हैं सूर्य की पूजा और स्नान

दान करके मिलती है कष्टों से मुक्ति

फल मिलता है जैसे किये हों दस हज़ार गौदान


रवींद्र कुमार शर्मा

घुमारवीं

जिला बिलासपुर हि प्र