ऑनलाइन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को बच्चों के लिए रुचिकर बनाएं

पिछले लगभग 1 वर्ष से भी अधिक समय से कोरोना वायरस ने पूरे विश्व को हिला कर रख दिया है जिस के दुष्प्रभाव हम सभी ने देखे हैं ।जान माल की हानि के साथ साथ हमारे जीवन के अन्य अनेक पहलुओं को भी इस खतरनाक वायरस ने बुरी तरह से प्रभावित किया है। विश्व में शायद ही कोई परिवार ऐसा होगा जो इस जानलेवा कोरोना की मार से बचा होगा ।कहीं कम तो कहीं ज्यादा किसी ना किसी रूप में सभी लोगों को इसका संक्रमण हुआ है जिसके चलते हम सभी ने ऐसा कुछ खोया भी है जिसकी भरपाई की ही नहीं जा सकती।

बाद यदि देश की अर्थव्यवस्था के बाद अन्य क्षेत्रों की करें तो इस संक्रमण का सबसे अधिक प्रभाव शिक्षा पर ही पड़ा है और इस बात को नकारा नहीं जा सकता। अभिभावकों, अध्यापकों और छात्रों को जिन समस्याओं का सामना इस दौरान करना पड़ा है उन्हें सभी जानते हैं। ना जाने कितनी ही मुश्किलों और चुनौतियों का सामना कर कर हमारे अध्यापकों और छात्रों ने शिक्षा प्रक्रिया को निरंतर जारी रखा है और हर संभव प्रयास किया है कि शिक्षण अधिगम प्रक्रिया अब और अधिक प्रभावित ना होने पाए। इसे शिक्षकों और छात्रों का शिक्षा के प्रति जज्बा ही कहेंगे कि विपरीत परिस्थितियों में भी पठन-पाठन की प्रक्रिया को उन्होंने रुकने नहीं दिया और अपना शत-प्रतिशत देने का प्रयत्न किया और नई-नई शैक्षणिक तकनीकों का प्रयोग कर शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखा और आपसी समझ और सहयोग से शैक्षणिक गतिविधियों को अंजाम दिया। इस संदर्भ में अभिभावकों का सहयोग भी कुछ कम नहीं रहा।

साथ ही साथ इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि दूरदराज और ग्रामीण अंचलों में रहने वाले शिक्षकों और शिक्षार्थियों दोनों के लिए ही ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से शिक्षा प्रक्रिया को आगे लेकर जाना बहुत ही कठिन कार्य रहा है।कभी नेटवर्क की दिक्कत,तो कभी रिचार्ज ना होने की समस्या। गरीब तबके के बच्चों को तो और भी अधिक परेशानियां उठानी पड़ी हैं क्योंकि जिस घर में पढ़ने वाले 4 बच्चे और मोबाइल की 1 तो उन घरों में बच्चों की शिक्षा का स्तर क्या रहा होगा यह बताने की आवश्यकता शायद नहीं है।

परंतु परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हों, शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए हर शिक्षक को अपना वह हर संभव प्रयास करना चाहिए जिससे शिक्षा प्रणाली को बेहतर से बेहतरीन बनाया जा सके ।इसके लिए प्रत्येक अध्यापक को कुछ ऐसी तकनीकों और विधियों को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के दौरान प्रयोग करना चाहिए जिससे कि अधिक से अधिक बच्चे ऑनलाइन क्लास में आने के लिए लालायित रहें।

देखिए, शिकायतें तो कभी खत्म नहीं होती। कक्षा में बच्चे कम आते हैं या नहीं आते हैं ,संसाधनों का अभाव है, नेटवर्क की दिक्कत है, बच्चों के पास मोबाइल नहीं है, बच्चे पढ़ने आना ही नहीं चाहते ,अभिभावक शिक्षा को लेकर जरा भी सीरियस नहीं हैं, इन सभी शिकायतों को यदि हम कुछ समय के लिए एक तरफ रखकर शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को आकर्षक और मजेदार बनाते हैं तो निसंदेह हमारे बच्चे पढ़ने में रुचि दिखाएंगे और अपने अध्यापक के साथ उनका संबंध और भी अधिक आत्मीय हो जाएगा जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव उनके सर्वांगीण विकास पर भी पड़ेगा।

अध्यापक और छात्रों के बीच मधुर संबंध सदैव ही शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाते हैं। शिक्षा प्रक्रिया को रुचिकर बनाने के लिए अध्यापकों को ऑनलाइन शिक्षण के दौरान बच्चों की छोटी से छोटी उपलब्धि पर भी उन्हें शाबाशी देनी चाहिए,उनका हौसला बढ़ाना चाहिए और उन्हें भविष्य में अधिक बेहतर करने के लिए भी प्रेरित करना चाहिए। बच्चे कुछ बड़ा ही करें ,यह जरूरी तो नहीं ।छोटी-छोटी उपलब्धियों को नजरअंदाज ना करके उन्हें सराहना एक आदर्श शिक्षक नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है।

यदि संभव हो तो बच्चों की सृजनात्मकता को बढ़ाने के लिए अध्यापक को कुछ ऐसी गतिविधियां भी ऑनलाइन ही आयोजित करनी चाहिएं जिससे छात्रों के कौशलों का संपूर्ण और समुचित विकास हो सके ।संसाधनों के कम होने की वजह से छात्रों का विकास रुकना नहीं चाहिए।यूट्यूब और अन्य अनेक सोशल मीडिया माध्यमों से कुछ ऐसी गतिविधियां भी ली जा सकती हैं जो शिक्षाप्रद होती हैं और साथ ही साथ जिनका संबंध हमारे नौनिहालों के विकास से होता है।

बच्चे किसी भी चीज को सुनने और पढ़ने की अपेक्षा देखने और करने से अधिक सीखते हैं और यही शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत भी है ।बच्चों को खुले माहौल में खुले दिमाग के साथ अपने मौलिक विचार लिखकर प्रेषित करने के लिए प्रेरित करें।


इसके अतिरिक्त कुछ अन्य छोटी-छोटी रुचिकर गतिविधियां भी ऑनलाइन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में अपनाई जा सकती हैं, जैसे : बच्चों को अपना कोई मनपसंद गीत या नृत्य रिकॉर्ड करके अपने अध्यापक के पास भेजने के लिए कहा जा सकता है,उन्हें अपने इच्छित चित्र की ड्राइंग बनाकर भेजने के लिए प्रेरित किया जा सकता है ,या फिर कुछ रोचक और आसान क्विज और अंताक्षरी का भी आयोजन शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से करवाया जा सकता है जिसमें छात्र बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और जिसका परिणाम यह होता है कि उनका अधिगम भी स्थाई हो जाता है।

इस प्रकार की कुछ बाल केंद्रित तकनीकों और विधियों का प्रयोग कर अध्यापकगण ऑनलाइन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को बेहतरीन स्वरूप प्रदान कर बच्चों के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान दे सकते हैं और यही वर्तमान समय की मांग भी है।


पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग दिल्ली