॥ रूठ गई मेरी खुशी ॥

अय खुशी तुम कब तलक मुझसे

रूठ कर मेरे बगल से गुजरती रहेगी

मेरी किस भूल की इस तरह मुझे

अपनी सजा मुझे  यूँ देती ही रहेगी


कुछ तो बता जा मुझसे कभी क्या

कभी हुई है छोटी सी भी     खता

अय खुशी मुझे मेरे उस भूल    की

मत दो मुझे ऐसी इस जग में   सजा


एक दिन मेरे गम पर तुम भी जरूर

पछतायेगी और मेरे लिये रोयेगी

उस दिन तेरी सारी हेकड़ी घंमड का।

निकल जायेगी टुट जायेगी 


तुम्हें मैने अपने आँगन में 

बसाने की हर कोशिश किया था

मगर तुनेँ मेरी हर बात को हॅस कर

अनदेखी कर उड़ा दिया था हर पल


इतनी भी बेरूखी होती नहीं है अच्छा

मैं तो वक्त का मारा एक इन्सान हूँ सच्चा

कोई शिकवा शिकायत हुई होगी जरूर

हर गाँव में हर गली में दुश्मन का है दस्तुर


उनकी कोई बातों से ना होना तुम कभी खफा

मैं हर दिन हर पल तेरे साथ निभाऊँगा अपनी वफा

अब तो मान जा सुन ले मेरी विनती की अर्जी

घर के ऑगन में देख लूँ हर पल हर दिन तेरी खुशी


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088