औकात मेरी

क्या है औकात मेरी 

और क्या लिख जाऊँ मै

खुद से बोलू खुद से पूछूँ, 

पर जवाव न पाऊँ मै

हर पल जोड़ती हूँ खुद को मैं, 

पर मुझे तिनको सा 

बिखेर जाते क्यों हो? 

कोशिशों से पा लेती हूँ 

मैं मज़िल अपनी

मेरी कामयाबी से तुम 

घबराते क्यों हो? 

अपमानित करते हो मेरे 

वज़ूद को प्यार का वास्ता देकर

ये झूठा हक़ तुम मुझ पर 

यूँ ही जताते क्यों हो? 

कच्ची मिट्टी से नही 

बनी है मेरे दिल की दीवारें

बार बार मुझे बरसात से 

तुम डराते क्यों हो? 

दुनियाँ की सारी बातें , 

बस एक बात पर 

रुक जाती है ये बता दो, 

हर बात को औकात पर 

लाते क्यों हो? 

बहुत तकलीफ़ देती है 

ये खामियाँ तुम्हारी

मुझे मालूम है मेरी औकात

हर वक़्त जताते क्यों हो? 


सरिता प्रजापति 

दिल्ली