"देश के शुभचिंतक बनों"

चुनावी माहौल छाते ही इंसानों का दिमाग षडयंत्र की फैक्ट्री बन जाता है। कैसे-कैसे बचकाने जुमले और विपक्षियों को नीचा दिखाने वाली मनघडंत बातें करने लगते है। विवेक और सम्मान की धजिया उड़ाते खुद को स्थापित करने की होड़ लगी रहती है। देश की किसीको परवाह नहीं, अपनी कुर्सी बची रहनी चाहिए। चुनाव आते ही सत्ता के मोहांध नेताओं के मन में एक तरफ़ चाणक्य तो दूसरी तरफ़ नारद मुनी बैठकर दंगल खेलते रहते है। 

भीतर से सब जानते है कि सच क्या है, और कौन सक्षम और कुर्सी के लायक है फिर भी जनता के दिमाग में ज़हर घोलते धर्म के नाम पर वोट-बैंक की राजनीति खेलते देश की नींव खोखली करने में लगे रहते है। आज देशप्रेम की भावना ने दम तोड़ दिया है, सबको अपनी तिजोरी की परवाह है। सत्ता चली जाएगी तो लक्ष्मी भी रूठ जाएगी इसलिए दोगलेपन नेताओं के लिए भारत माता की अस्मिता और गौरव नहीं सत्ता का मोह सर्वोपरि हो गया है। 

दरअसल देश को स्थायी और मजबूत सरकार की जरूरत है, जो फ़िलहाल सत्ता पर है। सच पूछो तो सारे विपक्षियों को अपने दफ़्तर को अलीगढ़ी ताले लगा देने चाहिए, क्यूँकि एक भी पार्टी में ऐसा नेता नज़र नहीं आ रहा जिस पर भरोसा करते हम देश की कमान उनके हाथों में सौंप सकें। 

इतनी बड़ी आबादी वाले देश को संभालना आसान काम नहीं पर मोदी जी की कोशिश काबिले तारीफ है। पर कुछ जयचंदों को पेट्रोल डिज़ल और गैस में दस रुपये की बढ़ोतरी पर ही अटके रहना है। मोदी के कार्यकाल में जो विकास हुआ, बेटियों के लिए योजनाएं बनी, सड़कें बनी, मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ, तीन तलाक हटे, 370 हटी, सरहद पर शांति का माहौल बना, कश्मीर आज़ाद हुआ, पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मन को दबोच लिया गया, बम धमाके बंद हुए, राम मंदिर का निर्माण हुआ और सबसे बड़ी बात भारत की धूमिल छवि दुनिया के सामने झिलमिलाते उपर उठी यही बात साबित करती है की मोदी जी का नेतृत्व एक ताकतवर और सक्षम है। आज दुनिया के सारे बड़े देश भारत को सम्मानित नज़रों से देख रहे है, साथ खड़े है ये मोदी जी की मेहनत का ही नतीजा है। दर असल तो अगर सत्ता पर आकर सबको देश की सेवा ही करनी है तो एक आवाज़ उठाकर कहना चाहिए कि मोदी जी संभालिए देश की बागडोर हम आपके साथ है। मजबूत नेतृत्व का पीठबल बनकर कंधे से कंधा मिलाकर सहकार देते मौजूदा सरकार का सपोर्ट करते देशप्रेम निभाना चाहिए। 

पर ना क्यूँ करेगा ऐसा कोई? किसे जनता की परेशानियों से लेना-देना है, किसे देश के प्रति ममत्व है, किसको तिरंगे से प्रेम है सबको देश को लूटना है। अपनी तिजोरी खाली नहीं रहनी चाहिए, पीढ़ी दर पीढ़ी अपने घर का सदस्य सत्ता पर रहना चाहिए। न शिद्दत वाला देशप्रेम बचा है, न हिन्दु की फ़िक्र न हिन्दुत्व की। किसी खास कोम को राज़ी करके कुर्सी टिकाने की जद्दोजहद मात्र होती है। और इसी मानसिकता के चलते देश में वामपंथी पैदा हो रहे है जो देश की अखंडता को तोड़ने का काम करते है। देश को उपर उठाना है, आगे ले जाना है तो एक बनों। जो सरकार अच्छा काम कर रही है उसको सहयोग देकर अपना कर्तव्य निभाओ, कुर्सी नहीं कर्म को अपना ध्येय बनाओ। देश के शुभचिंतक बनों तभी देश का भला होगा। 

भावना ठाकर 'भावु' (बेंगलूरु, कर्नाटक)