कोई तो बताए क्या होगा!!!

ओमिक्रान का बढ़ता दबाव - रणनीतिक पाबंदियां शुरुआती चरण में लगनी शुरू हो गई है 

राजनीतिक पार्टियों, नागरिकों, चुनाव आयोग और शासन प्रशासन को आपसी रणनीतिक तालमेल से चुनाव 2022 का रणनीतिक मसौदा तैयार करना ज़रूरी - एड किशन भावनानी

गोंदिया - नए साल नें एक बार फ़िर दस्तक दी है और दुनियां में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रान के मामले बढ़ते जा रहे हैं। साथियों हम याद करें तो, यह समय ठीक वैसा ही है जब पिछले साल भारत में कोरोना की पहली लहर की तबाही मचाने के बाद मामला अपने न्यूनतम स्तरपर आ गया था और फिर त्यौहार, बिहार चुनाव बिना किसी संकट के पार हो गए थे!! हम निश्चिंत हो गए थे कि भारत कोरोना की लड़ाई में करीब-करीब जीत चुका है और वैक्सीनेशन का पहला चरण 16 जनवरी 2021 से शुरू कर दिए थे, फ़िर दूसरी लहर ने अपनी तबाही चरम सीमां तक पहुंचा दी थी लेकिन कुछ राहत मिलने के बाद फिर ओमिक्रान वेरिएंट ने सब को डरा दिया है! किसी को मालूम नहीं हो रहा है और पूछ रहे हैं, कोई तो बताए क्या होगा!!! साथियों बात अगर हम वर्तमान स्थिति की करें तो ओमिक्रान वेरिएंट के बढ़ते दबाव के कारण अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस में स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है!! भारत में दिल्ली में वाई श्रेणी पाबंदियां लागू की गई है, जिसमें स्कूल कॉलेज बंद सहित अनेक पाबंदियां जारी है। महाराष्ट्र दूसरे क्रमांक पर आ गया है वहां भी अनेक पाबंदियां, न्यूईयर मनाने की नई पाबंदियां सहित जरूरी पाबंदियां लगाई गई है। साथियों बात अगर हम इस महामारी के फैलने की करें तो यह करीब करीब 22 राज्यों में फैल चुकी है और अब 2022 में होने वाले 5 राज्यों के चुनाव के लिए सभी पार्टियों चुनाव प्रचार में जी जान से भिड़ी हुई है, ऐसा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और टीवी चैनलों की ग्राउंड रिपोर्टिंग में दिखाया जा रहा है, और चैनलों पर डिबेट में राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ताओं द्वारा अपने अपने वक्तव्य दिए गए परंतु यह किसी ने नहीं कहा कि सभी पार्टियों द्वारा मिलकर आपसी सामंजस्य, एकमत से चुनावी रणनीति, चुनाव टालने, चुनाव सभाएं डिजिटल करने, विकल्पों पर विचार करने या अन्य किसी रणनीति पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दीगई जो चिंतनीय विषय है, और दर्शक देखते रह गए और बोले, कोई तो बताए क्या होगा!!! साथियों बात अगर हम प्रशासनिक स्थिति की करें तो दिनांक 29 दिसंबर रात हुई टीवी चैनल पर डिबेट में पैनलिस्टों द्वारा अपने विचारों में कहा चूंकि अभी चुनावी तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, अतः चुनाव आयोग इस संबंध में कुछ करने में असमर्थ है, परंतु चुनावी तारीखों की घोषणा हो जाने के बाद कंट्रोलिंग पॉवर स्थिति चुनाव आचार संहिता के अंतर्गत आजाएगी। परंतु अभी सतर्कता, पाबंदियां, नियमन, नियंत्रण रखना राष्ट्रीय, राज्य और जिला आपत्ती व्यवस्थापन प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत है उन्हें ही दिशानिर्देश देने हैं। साथ ही गृहमंत्री, संबंधित विभागों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। साथियों बात अगर हम नए वेरिएंट की करें तो अपेक्षाकृत नुकसान में कमी की संभावना है। 1) जानकारों के अनुसार ऐसा महसूस होता है कि डब्ल्यूएचओ द्वारा पिछले 1 सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार संक्रमण बढ़ा है, परंतु उस परिवेश में जनहानि कम हुई है क्योंकि स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, सतर्कता का अनुभव काम आ रहा है। 2) डेल्टा की तुलना में अस्पताल में भर्तियां कम है। 3) भारत में क़रीब 143.15 करोड़ से अधिक लोगों को टीका लगाया जा चुका है। भारत में करीब 90 प्रतिशत लोगों को कम से कम एक डोज़ लग चुका है। जबकि 61 प्रतिशत योग्य आबादी को दोनों डोज़ लग चुके हैं। इस परिपेक्ष में पूरे विश्व में दुनिया की आबादी का 57 प्रतिशत लोगों को कम से कम एक डोज़ लग चुकी है। भारत में 15 -18 उम्र और अन्य योग्य लोगों को डोज़ 3 और 10 जनवरी 2022 से बूस्टर डोज जिसे भारत में ऐतिहाती खुराक़ कहा गया है शुरू होगा। 4)कोराना की नेचुरल वैक्सीन, अभी तक के ओमीक्रॉन के विश्लेषण से  कई विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि ओमीक्रॉन कोराना महमारी को समान्य महमारी में परिवर्तित होने का संकेत है। ऐसा इसलिए है कि ओमीक्रॉन फेफड़ों को कम प्रभावित कर रहा है। जिसकी वजह से रोगी में ऑक्सीजन की कमी नहीं हो रही है। इसके अलावा गंभीर मरीजों की संख्या कम हुई है। जो इस बात का संकेत है कि अब कोविड-19 कमजोर हो रहा है। लॉस एंजिल्स के हार्ट स्पेशलिस्ट के मेडिकल डायरेक्टर अफशाइन इमरानी ने ट्वीट कर कहा है ओमाइक्रोन सचमुच वैक्सीन है जिसे वैक्सीन कंपनियां नहीं बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि वायरस के प्रसार के कारण 8-12 सप्ताह के भीतर दुनिया को टीका लग जाएगा। वह केवल सामान्य कोल्ड वायरस है, जिस पर घबड़ाने की जरूरत नहीं है। 5) कोरोना की दूसरी लहर से हम सब सबक और अनुभव ले चुके हैं जो अभी काम आ रहा है। हालांकि, उपरोक्त स्थिति को देखते हुए महसूस हो रहा है कि अभी तक और आगे भी हम सुरक्षित रहेंगे फ़िर भी हमें कोविड उपयुक्त व्यवहार का तात्कालिक सख्ती से पालन करना अत्यंत ज़रूरी है। साथियों बात अगर हम प्रशासनिक सख़्ती की करें तो दिनांक 29 दिसंबर 2021 को रात को राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ताओं, विशेषज्ञों, जानकारों द्वारा टीवी डिबेट में पैनलिस्ट्स के रूप में अपने अपने विचार रख कर जानकारी दी गई कि चूंकि अभी चुनावी तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, अतः चुनाव आयोग इस संबंध में कुछ करनेमें असमर्थ है,परंतु चुनावी तारीखों कीघोषणा हो जाने के बाद कंट्रोलिंग स्थिति चुनावी आचार संहिता के अंतर्गत आ जाएगी। परंतु अभी सतर्कता, पाबंदियां नियमन विनियमन बनाना, लागू करना, राष्ट्रीय, राज्य और जिला आपत्ती व्यवस्थापन प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत है उन्हें दिशा निर्देश देने हैं। साथ ही गृह मंत्रालय सहित संबंधित विभागों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। साथियों बात अगर हम राज्यों द्वारा उठाए गए कदम पाबंदियों की करें तो, कोरोना वायरस का वैर‍िएंट ओमिक्रोन देशभर में तेजी से फैलता जा रहा है, जिसके बाद कई राज्‍यों में कोविड केसों में बढोतरी दर्ज की गई है। इसे देखते हुए कई राज्‍यों में एहतियातन पाबंदियां लगाई गई हैं और लोगों से लगातार सतर्कता बरने की अपील की जा रही है। भारत में ओमीक्रॉन के मामले 960 के आंकड़े को पार कर गए हैं। और कोविड-19 के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों में भारी बढ़ोतरी के बीच महाराष्ट्र सरकार ने न्यूईयर मनाने के लिए गाइडलाइंस जारी कीं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोरोना के मामले खतरनाक स्थिति तक पहुंच गया है। महाराष्‍ट्र में बढ़ते कोविड केस के बीच स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि यहां जल्‍द कड़े प्रतिबंधों को लेकर फैसला लिया जाएगा। 15-18 साल की उम्र के बच्‍चों व किशोरों के वैक्‍सीनेशन को लेकर भी उन्‍होंने सरकार का पक्ष रखा। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि कोई तो बताए क्या होगा!!! ओमिक्रान के बढ़ते दबाव से, रणनीतिक पाबंदियां शुरुआती चरण में लगनां शुरू हो गई है तथा राजनीतिक पार्टियों, नागरिकों, चुनाव आयोग और शासन प्रशासन को रणनीतिक तालमेल से चुनाव 2022 का रणनीतिक मसौदा तैयार करना अत्यंत ज़रूरी है।


-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ, एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र