चुनावी रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे

कोरोना अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि इसके जैसा ही या यूं कहे कि कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक एक और संकट ओमीक्रोन वैरीअंट के रूप में मनुष्य जाति को अपने चंगुल में तेजी से ले रहा है। इसके संक्रमण की दर इतनी अधिक तेजी से बढ़ रही है कि विश्व के अनेक देशों ने तो अपने-अपने देशों में लॉक डाउन तक घोषित कर दिया है।हमारे देश भारत में भी अनेक राज्यों में कर्फ्यू की घोषणा कर दी गई है ताकि ओमिक्रोन से होने वाले खतरे को टाला जा सके। 

देश की राजधानी दिल्ली में भी रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया है। दिल्ली सरकार ने जनता को चेताते हुए दिल्ली में येलो अलर्ट की घोषणा कर दी है जिसके अंतर्गत केवल अति आवश्यक चीजों के लिए ही दुकानों को खोला जा सकेगा। गैर जरूरी सामान की दुकानों को सम विषम के आधार पर खोलने की अनुमति दी गई है। राजधानी के सभी स्कूल ,कॉलेज, जिम ,कोचिंग सेंटर, एकेडमी इत्यादि को पूर्णतया बंद कर दिया गया है। स्कूलों को बंद करने के पीछे सरकार की सोच शायद यही रही है कि अधिकतर स्कूली छात्रों को अभी कोरोना वैक्सीन नहीं लग पाई है जिसकी वजह से उन्हें संक्रमण का खतरा अन्य लोगों से ज्यादा है ।गौरतलब है कि भारत में अभी 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगनी शुरू नहीं हुई है, हालांकि यह  बहुत जल्द ही शुरू होने वाली है।दिल्ली में शादी ब्याह जैसे उत्सवों एवं अंतिम संस्कार जैसे कार्यक्रमों में भी लोगों की संख्या 20 निश्चित कर दी गई है ताकि एक दूसरे से संपर्क में आने पर संक्रमण तेजी से ना फैले।

देश में कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को देख कर ही विभिन्न राज्यों की सरकारों ने ऐसी पाबंदियों की घोषणा की हैं। राजधानी दिल्ली में क्योंकि कोरोना संक्रमण पिछले कुछ दिनों से बहुत ही तेजी से फैल रहा है इसलिए दिल्ली सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे समाजिक दूरी का पालन करें एवं बिना मास्क के घर से बाहर ना निकलें,जितना जरूरी है उतना ही घर से बाहर निकलें,अति आवश्यक कार्यों के अतिरिक्त घर से बाहर निकलना बंद करें।साथ ही जिन्होंने अभी तक कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाई है वे तुरंत वैक्सीन लगवाएं। कोरोना के बढ़ते मामलों पर भी सरकार ने अपनी चिंता जाहिर की है और लोगों को चेताया है कि यदि इसी प्रकार से संक्रमण बढ़ता रहा तो बाजारों को पूर्ण रुप से ही बंद कर दिया जाएगा।

दिल्ली सरकार के उठाए गए इस कदम से निश्चित रूप से कोरोना संक्रमण की दर धीमी पड़ेगी, परंतु यहां एक बात ध्यान देने वाली है कि क्या सिर्फ बाजारों में होने वाली भीड़ से ही कोरोना संक्रमण बढ़ता है आगामी चुनावों के लिए विभिन्न राजनैतिक दलों द्वारा जो रैलियां निकाली जा रही हैं, क्या वह संक्रमण को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार नहीं होंगी? क्या उनमें शामिल लोगों को संक्रमण का खतरा नहीं होगा ? क्या वे कोरोना संक्रमण को तेजी से नहीं फैलाएंगे? इस बात की क्या गारंटी है कि रैली में शामिल सभी लोगों को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है? क्या रैली में शामिल लोग रैली की अतिरिक्त अपने परिचितों घरवालों रिश्तेदारों से संपर्क में नहीं आएंगे? और यदि वे किसी अन्य के संपर्क में आएंगे तो क्या उनसे दूसरों को संक्रमण का खतरा नहीं होगा? क्या इन सब सवालों के संतोषजनक जवाब किसी भी राजनीतिक दल के पास मिलेंगे? क्या यह राजनीतिक दल संक्रमण से होने वाले नुकसान की भरपाई करने के लिए तैयार हैं?

पिछले वर्ष के हालातों को देखते हुए हम सब एक बात तो बेहतर तरीके से समझ ही गए हैं कि कोरोना रंग ,रूप ,जाति ,वर्ग, आयु ,छोटा ,बड़ा, कमज़ोर,ताकतवर, सरकारी ,गैर सरकारी, गरीब और अमीर कुछ नहीं देखता। यह संक्रमण कभी भी किसी को भी किसी से भी हो सकता है। इसीलिए बार बार सामाजिक दूरी अपनाने की सलाह दी जाती है और मास्क ना उतारने तथा बार बार साबुन से हाथ धोने के लिए कहा जाता है ।

इतना सब होने पर भी यदि आम जनता और नेतागण इस समस्या या यूं कहें इस भयावह स्थिति को सीरियसली नहीं लेते हैं तो फिर कोरोना संक्रमण को बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।यदि यही हालत रहे,तो इतिहास स्वयं को अवश्य दोहराएगा।

ऐसे नाजुक हालातों में सरकार को चाहिए कि चुनावों को फिलहाल स्थगित कर दिया जाए और चुनावी रैलियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाए जिससे कि कोरोना संक्रमण को और आगे बढ़ने से रोका जा सके और लोगों के स्वास्थ्य और जान के साथ खिलवाड़ ना हो सके ।विश्व में कोई भी चुनाव ,कोई भी राजनीतिक पार्टी या सरकार लोगों की जिंदगियों से बढ़कर नहीं हो सकती यह बात हमारी सरकारों को भी समझनी होगी और इस क्षेत्र में यथाशीघ्र उचित कार्यवाही करनी होगी।


पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग दिल्ली