अननॉन नंबर

बात कुछ दिन पहले की  है, मैं अपने परिवार सहित खरीदारी करने के लिए मार्केट गई हुई थी। चारों तरफ भीड़ भाड़ होने की वजह से मार्केट में बहुत अधिक शोर था। मेरा मोबाइल मेरे हाथ में ही था जिसे मैंने वाइब्रेशन मोड पर कर दिया था ताकि शोर अधिक होने पर यदि किसी का फोन आए तो मुझे मालूम पड़ जाए क्योंकि शोर की अधिकता में अक्सर फोन की रिंगटोन सुनाई नहीं देती है। मैं अपने बेटे के लिए घड़ी खरीद ही रही थी कि अचानक एक कॉल आई। फोन वाइब्रेशन पर था इसलिए मुझे तुरंत पता चल गया परंतु अननोन नंबर होने की वजह से मैंने फोन रिसीव नहीं किया क्योंकि सामान्यता मैं अननॉन नंबर कम ही रिसीव किया करती हूं।

ख़ैर, उस अननोन नंबर से दो बार फोन आया और फिर बंद हो गया। मैंने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अपनी खरीदारी में व्यस्त हो गई। खरीदारी करते करते हम सभी को जोरों से भूख लगी और हमें सामने ही एक रेस्टोरेंट दिखाई दिया,जहां जाकर हमने कुछ खाने का प्लान बनाया ।जैसे ही हम लोग रेस्टोरेंट के अंदर जाकर बैठे, तभी मेरे फोन पर एक कॉल आई।जैसे ही मैंने नंबर देखा,मैं हैरान हो गई क्योंकि यह कॉल उसी अननोन नंबर से आ रही थी जिस नंबर से कुछ देर पहले भी मुझे फोन आया था।मैं सोचने लगी कि आज मुझे उसी सेम अननॉन नंबर से बार-बार फोन क्यों आ रहा है। उस वक्त मुझे पक्का विश्वास हो गया कि हो ना हो यह कोई फ्रॉड या स्पैम नंबर है और मेरे बारे में कुछ जानकारियां हासिल करना चाहता है तभी उसी नंबर से मुझे बार-बार फोन आ रहा है। फिर मेरे दिमाग में यह भी आया कि वह जरूर कोई असामाजिक तत्व होगा जिसने कहीं से मेरा नंबर ले लिया है और अब मुझे परेशान करने की मंशा से मुझे बार-बार फोन लगा रहा है। यह सब सोचकर मैं थोड़ा घबरा भी गई और परेशान भी हो गई।परंतु मैंने फिर भी उसका फोन नहीं उठाया और खाना खाने लगी। 

खाना खाने के बाद हम रेस्टोरेंट्स से जैसे ही बाहर निकले फिर उसी नंबर से वापिस कॉल आई। उस अननोन नंबर को देखकर इस बार मैं इतना अधिक घबरा गई कि मैंने अपने मोबाइल को स्विच ऑफ करना बेहतर समझा ताकि कुछ देर के लिए मैं तनाव मुक्त रहकर खरीदारी कर पाऊं।साथ ही मुझे यह भी लगा कि शायद स्विच ऑफ पाने पर वह अननॉन व्यक्ति उस अननोन नंबर से आगे दोबारा मुझे कभी कॉल नहीं करेगा।

फोन स्विच ऑफ करने के बाद मैंने ट्रूकॉलर पर उस अननोन नंबर को तलाशना चाहा क्योंकि मैं देखना चाहती थी कि आखिर वह नंबर किस व्यक्ति का है और जब मैंने ट्रूकॉलर पर वह नंबर तलाशा तो वहां किसी अजनबी का नाम आया ।मैंने यह सोच कर राहत की सांस ली कि अच्छा ही हुआ कि मैंने फोन स्विच ऑफ कर दिया,कम से कम कुछ समय के लिए तो अब उस अननोन नंबर से फोन नहीं आएगा।

 उसके बाद हमारी खरीदारी पूरी हुई और हम घर वापस लौट आए ।जैसे ही हमने घर के अंदर कदम रखा तुरंत मैंने अपना मोबाइल स्विच ऑफ मोड से हटाकर स्विच ऑन मोड पर कर दिया। कुछ देर पश्चात जब हम सब फ्रेश होकर शाम की चाय का लुत्फ़ उठा रहे थे तभी अचानक मेरे एक जानकार संपादक महोदय जी का मुझे फोन आया। मैंने तुरंत उनका फोन उठाया । मेरे फोन उठाते ही उन्होंने बड़े ही भद्र और अपनेपन से बात करते हुए मुझसे पूछा कि क्या मैं कहीं व्यस्त हूं। मैंने उनको बताया कि-सर आज मैं पूरा दिन बाजार में खरीदारी करने में व्यस्त थी। इस पर उन्होंने मुझे कहा कि मुझे लग ही रहा था कि आप कहीं व्यस्त होंगी,तभी आप फोन नहीं उठा रही हैं। उनकी यह बात सुनकर मैं हैरान हो गई। मैंने उनसे पूछा- आदरणीय आपने मुझे कब फोन किया और मैंने आपका फोन कब नहीं उठाया क्योंकि मेरे पास तो आपके नंबर से कोई फोन आया ही नहीं। मेरी यह बात सुनकर उन्होंने मुझसे कहा कि- महोदया, मैंने आपको फोन नहीं किया परंतु आपके क्षेत्र का डाकिया आपको सुबह से लगातार फोन कर रहा है क्योंकि वह हमारे द्वारा भेजी गई पुस्तक आप तक पहुंचाना चाहता है, परंतु आप से उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है क्योंकि आप उनका फोन नहीं उठा रही हैं।उनकी यह बात सुनकर मुझे सारा माजरा समझ में आ गया।तब मैंने उन्हें बताया कि- सर आप बिल्कुल सही कह रहे हैं  क्योंकि एक अननोन नंबर से लगातार मेरे पास फोन आ तो रहा था,परंतु अननोन होने की वजह से मैं फोन नहीं उठा रही थी।इस पर संपादक सर जी ने मुझसे कहा- हांजी, वह अननॉन नंबर उन्ही डाकिया महोदय जी का है और अगर अब उस नंबर से फोन आए तो आप कृपया उनसे बात कर लीजिएगा क्योंकि उन्हें आपका घर का पता कुछ समझ नहीं आ रहा है ,उन्हें शायद कोई कंफ्यूजन है। 

उनकी यह बात सुनकर मुझे काफ़ी पछतावा भी हुआ और हैरानी भी। मैंने तुरंत उस नंबर पर वापस कॉल किया और डाकिया महोदय से बात कर उन्हें सारी स्थिति समझाई और उनसे क्षमा भी मांगी कि उन्हें मेरी वजह से बार-बार फोन करने पड़ रहे थे और परेशान होना पड़ रहा था ।डाकिया महोदय ने सारी स्थिति को समझा और बात को सहज लिया,साथ ही मेरा पूरा एड्रेस भी कंफर्म कर लिया और वायदा किया कि अगली सुबह ही वह मुझे मेरी पुस्तक देने आएंगे। मैंने उनका बहुत धन्यवाद किया।

इस पूरे वाकया से मुझे दो बातें तो समझ में आ ही गई।पहली बात तो यह कि,प्रत्येक अननोन नंबर से फोन करने वाला व्यक्ति गलत नहीं होता।कभी-कभी जब किसी कारणवश हमारे पास हमारे किसी अपने परिचित का नंबर सेव नहीं होता है तो वह भी हमारे लिए अननोन नंबर ही होता है। कभी-कभी अननोन नंबर देख कर भी हमें फोन उठा लेना चाहिए और सामने वाले से बात होने के पश्चात ही यह निर्णय करना चाहिए कि अननोन नंबर से कॉल करने वाला व्यक्ति सही है या गलत।

और दूसरी और अति उत्तम बात यह कि,दुनिया में अभी भी अच्छे और परोपकारी लोगों की कमी नहीं है और जिसकी वजह से ही यह दुनिया इतनी सरलता और सहजता से चल रही है।

पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग दिल्ली

दिल्ली