भाजपा ने स्वीकार की अपनी नैतिक हार, पीएम व सीएम साम्प्रदायिक बातें करने पर उतरे-प्रमोद तिवारी

लालगंज, प्रतापगढ़। केन्द्रीय कांग्रेस वर्किग कमेटी के सदस्य एवं आउटरीच एण्ड को-आर्डिनेशन कमेटी के यूपी प्रभारी प्रमोद तिवारी ने आगामी विधानसभा चुनाव मे आंतरिक आकलन के आधार पर भाजपा द्वारा अपनी नैतिक हार स्वीकार करने का दावा किया है। श्री तिवारी ने कहा कि किसान, मंहगाई, छुटटा मवेशी, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, कोरोना आदि मुददो पर चुनाव न लडते हुए संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिर्फ साम्प्रदायिक बातें कह रहे हैं। सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश मे पांच साल के शासन के बाद भी भाजपा के पास आगामी चुनाव मे एक भी उपलब्धि गिनाने के लिए नही है। श्री तिवारी ने दावा किया कि प्रदेश की जनता इस बार भाजपा को करारी शिकस्त देते हुए सौ सीटों के भीतर सिमट जायेगी। मीडिया प्रभारी ज्ञानप्रकाश शुक्ल के हवाले से गुरूवार को जारी बयान मे सीडब्लयूसी मंेबर प्रमोद तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीनों काले कृषि कानून वापस लिये और पीएम मोदी ने देश के किसानों के साथ जनता से माफी मांगी किंतु हाल ही मे केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के नागपुर मे दिये गये बयान मे कुछ लोगों के विरोध के कारण कृषि कानून पर एक कदम पीछे हटने और बाद मे दोबारा कानून बनाये जाने की मांग भाजपा की किसानो के प्रति धोखा को दिखाता है। श्री तिवारी ने दावा किया है कि आगामी प्रदेश के विधानसभा चुनाव मे पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी के नेतृत्व मे प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कानपुर मे इत्र व्यापारी पीयूष जैन के यहां छापे मे बरामद हुये दो सौ करोड़ से अधिक रूपये की बरामदगी को नोटबंदी की कहानी का जीता जागता उदाहरण करार दिया है। उन्होनें कहा कि देश की जनता जानना चाहती है कि दीवारो मे छिपाकर रखा गया करोड़ो रूपये और विदेशी सोना देश मे कैसे आया इसके लिए पूरी तरह केन्द्र व राज्य सरकार की जिम्मेदारी बनती है। प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए सीडब्ल्यूसी मेंबर ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने आप को फकीर कहते है लेकिन दस लाख रूपये का सूट पहनते हैं तथा बारह करोड रूपये की कार व सत्रह हजार करोड़ के वायुयान से चलते है। उन्होनें प्रदेश के मुख्य सचिव को बदलने के पीछे सरकार की असफलता को छिपाने वाला कदम बताया है।