मोबाइल

नवयुवाओं की सोच

नफा भी तू , वफा भी तू

जफ़ा भी तू , हमनवा भी तू।।

जिस्म़ तू , जां भी है तू

तू नहीं तो लगे अधूरे से हम।।

मेरा मान तू , मेरी शान तू

मेरे बाथरूम में भी संग रहे है तू

वक्त कटे ना जैसे बिन तेरे सुन

मेरी खाने की मेज़ पर भी रहे तू

बार बार तुझे ना देखूं तो बैचेन होता

रख कहीं तुझे भूल जाऊं दिल रोता

हर राज़ का मेरे राजदार है तू

मेरी फिंगर प्रिंट का आदि भी तू

तूही तो है जिसपे अधिक एतबार मेरा।।

मेरा प्यार सिर्फ तेरा।।२।।

कौन है ये--- मोबाइल।।

वृद्ध पीढ़ी

सर्वनाश तेरा ए डब्बे

बच्चों को तूने बिगाड़ा

घर के बाहर जाते नहीं 

खेल हमारे जमाने के आते नहीं

वशीकरण कर दिया तूने इनपर

कलमुहे तेरा नाश हो घनेरा।।

हम बुजुर्गों को अब वक्त न देते

मोबाइल पर लगे सख्त ही रहते

बताओ तुम्हें कोसे नही तो क्या करें

ओ डब्बे बेजान सासों वाले घनेरा।।

कौन है ये-- ये कलमुहां मोबाईल

वीना आडवानी तन्वी

नागपुर, महाराष्ट्र