मृदा का हीमोग्लोबिन है:जीवांश पदार्थ

 आजमगढ़- मृदा की उर्वरता  उत्पादकता जीवंतता हेतु जिम्मेदार कारक जीवांश तत्व जो लगातार रासायनिक उर्वरक कीटनाशी , रोगनाशी खरपतवार नासी आदि के लगातार एवं अंधाधुंध प्रयोग होने के नाते घटता जा रहा है। जीवांश तत्व यदि मृदा में 0.5%से कम है तो न्यूनतम 0.5 से 0.75 %है तो मध्यम तथा 0.75 % से अधिक है तो उत्तम होता है।

 जबकि वर्तमान में आजमगढ़ एवं पूर्वांचल केअधिकांश क्षेत्रों में जीवांश तत्व की मात्रा 0.2 से 0.4% ही रह गया है मृदा की पाचन शक्ति हेतु जिम्मेदार लाभदायक सुक्ष्म जीवाणु की मात्रा /संख्या हेतु जीवांश तत्व ही जिम्मेदार हैं 1.0 कुंटल गोबर की साड़ी खाद में मात्र आधा किलो नाइट्रोजन होता है जबकि शेष 99.5 किलोग्राम  जीवांश तत्व है कृषक भाइयों को अस्थाई /टिकाऊ  मृदा उर्वरता, उत्पादकता बनाये रखने हेतु कायम जिवांश तत्व बढ़ाने वाले हर तकनीकी जैसे फसल अवशेषों का प्रबंध जैविक खाद जैसे वर्मी कंपोस्ट, नाडेप कंपोस्ट ,त्वरित बायो कंपोस्टिंग,जैव उर्वरक जैसे राइजोबियम ,एजेटोबैक्टर एजोस्पाइरम, फास्फेटिक, अजोला, नील हरित शैवाल आदि के प्रयोग को बढ़ावा देना होगा कृषि विज्ञान केंद्र कोटवा के वरिष्ठ मृदा वैज्ञानिक डॉ रणधीर नायक जी ने केंद्र के अंगिकृत ग्राम गंधुवई मे विश्व मृदा दिवस के कार्यक्रम के अंतर्गत  ग्राम के 96 कृषक भाइयों/ बहनों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करते हुए फसली इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की मृदा  परीक्षण के आधार पर पोषक तत्व देने से   खेती की लागत में कमी ,भरपूर उत्पादन के साथ ही  पोस्टिक खाद्यान्न के उत्पादन पर बल दिया।

डॉ नायक ने बताया कि स्वस्थ्य मृदा से ही स्वस्थ समाज की परिकल्पना साकार होती है। 

 इस कार्यक्रम में संजय गुप्ता, सत्यदेव मौर्य, रमेश तिवारी , श्री नारायणन सिंह सुर्यनाथ सिंह ,जयप्रकाश सिंह ,इंद्रसेन सिंह,रामानुज सिंह आदि सम्मिलित हुए।