"सपना तो सपना है।"

सपना तो बस सपना है।

यथार्थ के धरातल पर कोरी परिकल्पना है।

अस्तित्व उसका उतना है,

जब तक वो एक सपना है। 

सपना जब हकीकत बन जाता है,

तो टूट जाता है, बिखर जाता है। 

ये कल्पना फिर भी सुखद तो है,

इसमें अपनेपन का दर्द तो है। 

काश ऐसा हो जाए,

सपना कोई हकीकत बन जाए। 

टूट न पाए, हो जाए अटूट,

जीवन का मकसद हल हो जाए।


अर्चना त्यागी

जोधपुर राजस्थान