मनमीत

मेरे एहसास में हो तुम,

मेरी हर साँस में हो तुम।

मेरे हमराह मेरी ,

जिन्दगी के ख्वाब में हो तुम।

मेरी हर आरजू हो तुम,

मेरी हर जुस्तजू हो तुम।

मेरे हमराह मेरे,

ख्वाब से रुबरु हो तुम,

मेरे श्रिंगार में हो तुम,

दिल की झंकार में हो तुम।

मेरे हमराह मेरी,

बिन्दीया के फंकार में हो तुम।

मेरे आगाज हो तुम,

मेरे अंजाम हो तुम।

मेरे हमराह मेरी ,

दुनिया का विस्तार हो तुम।

मेरे हर गीत में हो तुम,

मेरे संगीत में हो तुम ।

मेरे हमराह मेरे ,

जीवन के" मनमीत "हो तुम।

 

वन्दना पाण्डेय,वरिष्ठ कवयित्री व 

शिक्षिका,गोरखपुर-उत्तरप्रदेश