ओमीक्रॉन वेरिएंट और हमारे अवयस्क बच्चे


कोरोना संक्रमण का खतरा अभी कुछ हद तक नियंत्रण में आया ही था कि ओमीक्रोन को लेकर विश्व भर के लोगों की चिंताएं लगातार बढ़नी शुरू हो गई हैं। दक्षिण अफ्रीका में व्यापक स्तर पर फैले इस ओमीक्रोन ने अब भारत में भी अपनी भयावह दस्तक दे ही दी है ।भारत के बेंगलुरु में ओमीक्रॉन के संक्रमण के 2 मामले सामने आए हैं। कोरोना संक्रमण को काबू में करने के लिए विश्व भर के देशों ने कोरोना के खिलाफ वैक्सीन की मुहिम चलाई और अपने अपने देश के नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए इस वैक्सीन की सुविधा प्रदान की जिसकी वजह से कोरोना संक्रमण का खतरा काफी हद तक टलने लगा था। यह भी सच है कि कोरोना का खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है ,केवल नियंत्रण की स्थिति में है इस पर कोरोना के एक नए वेरिएंट ओमीक्रोन का आना बेहद चिंता का विषय है।

अनुसंधान एवम चिकित्सा विभाग के अनुसार ओमीक्रोन वेरिएंट कोरोना वैरीअंट की अपेक्षा 5 गुना अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि यह बेहद संक्रामक है और जिस तेजी से यह दक्षिण अफ्रीका से निकल कर विश्व भर के अन्य देशों में बुरी तरीके से फैल रहा है उससे एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि हमें इसे हल्के में कतई नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह बहुत ही तीव्र गति से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है।

दक्षिणी अफ़्रीका के डॉक्टरों एवम मेडिकल काउंसिल के मुताबिक वैसे तो ओमीक्रोन वैरीअंट संक्रमण के कोई खास लक्षण मरीज में दिखाई नहीं देते, परंतु थकान का अनुभव करना ,तेज सिर दर्द होना, तेज बुखार होना ,गंध अर्थात सूंघने की शक्ति का ह्रास होना यह सब लक्षण इसके संक्रमण की निशानी समझे जा रहे हैं।

बहुत से वैज्ञानिक एवं चिकित्सक इस ओमिक्रॉन वैरीअंट को एक वरदान अर्थात ब्लेसिंग भी मान रहे हैं। उनके अनुसार यदि यह वैरीअंट कोरोना को रिप्लेस करता है तो यह कोरोना को जड़ सहित खत्म कर देगा और कोराना से होने वाले संक्रमण का खतरा हमेशा हमेशा के लिए पूरे विश्व से टल जाएगा

उस सूरत में पूरा विश्व कोरोना को अलविदा कहेगा और चैन की सांस लेगा। ओमिक्रोन वैरीअंट को इतना अधिक प्रभावी नहीं माना जा रहा है एवं कुछ सावधानियां रखने और समय पर निदान होने पर इस संक्रमण के खतरे से आसानी से बचा जा सकता है। यहां याद रहे कि, कोरोना से बचने के लिए जिन जिन सावधानियों का हम सभी ने आज तक ध्यान रखा, जिन प्रोटोकॉल का हम सभी ने पालन किया उन सभी का अभी भी पालन करना होगा एवं नए वैरीअंट के खतरे को टालने के लिए हमें अभी भी भीड़-भाड़ से बच कर रहना होगा, सेनेटाइजर का प्रयोग करना होगा ,बार-बार साबुन से अच्छे से हाथ धोने होंगे तथा सामाजिक दूरी के नियमों का सख़्ती से पालन करना होगा।साथ ही घर से बाहर निकालने पर मास्क लगाना भी अनिवार्य होगा।

इतनी सब बातें तो हम सभी ने समझ ली, परंतु आज के मेरे इस लेख के शीर्षक की बात करें तो उन बच्चों का क्या जिनकी आयु अभी 18 वर्ष से कम है और जिन्हें अभी तक वैक्सीन नहीं लगी है। 18 वर्ष या उससे अधिक के लोगों को वैक्सीन देकर संक्रमण के खिलाफ तो सरकार ने सुरक्षा प्रदान करवा दी है जो कि अति सराहनीय भी है, परंतु जो बच्चे अभी व्यस्क नहीं हैं एवं जिन्हें अभी सरकार द्वारा कोरोना वैक्सीन उपलब्ध नहीं करवाई गई है उन्हें नए वैरीअंट से संक्रमण का खतरा ज्यों का त्यों बना हुआ है। वैज्ञानिकों एवं चिकित्सकों के अनुसार जिन लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं उन पर ओमिक्रोन वेरिएंट ज्यादा असर नहीं कर पाएगा। उस स्थिति में उन लोगों के लिए यह अति चिंता का विषय है जिन लोगों को अभी तक वैक्सीन की सुविधा प्राप्त नहीं हो पाई है।इसमें उन लोगों का क्या दोष क्योंकि सरकार द्वारा ही अभी 18 वर्ष से कम आयु के नागरिकों के लिए वैक्सीन की सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। उन लोगों पर नए वेरिएंट का सबसे अधिक खतरा मंडरा रहा है, वह भी तब जब हमारे अपने देश भारत के अनेक राज्यों जैसे राजस्थान ,उत्तर प्रदेश,कर्नाटक और दिल्ली में भी यह वैरीअंट अपना रास्ता बना चुका है।

एक तरफ़ इस उम्र के बच्चों पर जहां पढ़ाई एवम चल रही परीक्षाओं का दबाव बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ नए वेरिएंट से संक्रमण होने का खतरा बच्चों के दिमाग पर बहुत ही गहरा असर डाल रहा है जिसके चलते वे पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पा रहे हैं। पिछले 2 वर्षों से वैसे ही बच्चे तनाव में जी रहे थे, कोरोना के कहर से अभी कुछ  राहत मिली ही थी कि ओमिक्रोन के खतरे ने बच्चों को वाकई में हिला कर रख दिया है। इस सब पर वैक्सीन ना होने का अफसोस 18 वर्ष से कम के बच्चों को अप्रत्यक्ष ही सही,परंतु एक प्रकार से मानसिक रूप से प्रताड़ित अवश्य कर रहा है ।मौजूदा हालातों में वे स्वयं को अति असहाय महसूस कर रहे हैं। 

 युवा वर्ग का इस प्रकार तनाव में रहना किसी भी राष्ट्र के लिए हितकारी नहीं हो सकता।ऐसी स्थिति में सरकार को पहले से अधिक सतर्क रहने और एक्टिव रहने की आवश्यकता है क्योंकि देश का कोई भी या यूं कहें विश्व का कोई भी व्यक्ति इतिहास को दोहराना नहीं चाहता। इसलिए सभी सरकारों को इस दिशा में उचित कदम उठाने होंगे एवं समय रहते नए वैरीअंट के संक्रमण को रोकने के अपनी सामर्थ्य से कहीं अधिक प्रयास करने होंगे ताकि देश का विकास अवरुद्ध न हो सके एवं जान माल की हानि होने से राष्ट्र स्वयं को बचा सके।

पिंकी सिंघल

अध्यापिका

शालीमार बाग दिल्ली