देखकर शगल मुस्कुराया दिया

देखकर शगल मुस्कुराया दिया,

लघु प्रहरी बन तम को हटाया दिया,

स्वयं जलकर भी दिन रैन,

औरों को राह दिखाया दिया।

कर्म की बलिवेदी पर आसक्त,

ऊर्जा से जगमगाया दिया,

भाग्य में अंकित अटल लौ से,

जग आलोकित कर हर्षाया दिया।

झेल झंझावतों को रहा अडिग,

लक्ष्य से न डगमगाया दिया।

वर्ति को बना जीवन संगिनी,

तेल के तपन में भी न अकुलाया दिया।

अंशुपति भी हुये अचंभित,

विकीर्ण किरणों से उनकी टकराया दिया,

स्याह निशा भी छंट जायेगी,

कर्म की लौ में जलना सिखाया दिया।

                 रीमा सिन्हा (लखनऊ)