॥ पंख लग जाने दो ॥

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क 


ख्वाबों का पंख लग जाने दो

सपनों में हमें खो जाने दो

दिल धड़केगा एक दुजै के लिये

बसंत में कली को खिल जाने दो


आँचल को हवा में लहराने दो

बादल को नभ पे छा जाने  दो

शबनम को दूब पे गिर जाने दो

रजनी को जमीं पे आ जाने दो


पैरों में पायल को बँध जाने दो

पायल की घूंघरू छनक जाने दो

प्यार की संगीत बज जाने दो

मेरे संग अपनी कदम बढ़ जाने दो


ऑखों में काजल को सज जाने दो

माथे पे बिन्दिया को चमक जाने दो

दिन की प्रकाश को छुप जाने दो

नजदीक अपने मुझे आ जाने दो


दिनकर को अस्ताचल में सो जाने दो

भौंरा को पंखुड़ी में चले जाने। दो

रातरानी को चमन में महक जाने दो

जरा पूरवाई को तो बह जाने दो


चँदा को चाँदनी में समां जाने दो

नभ पे सितारे को बहक जाने। दो

पपिहरा भी ढुँढेगी जीवन साथी

जरा रात की सफर ढल जाने दो


उदय किशाेर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088